घर संभालने वाली महिला बनीं ‘ड्रोन दीदी’! स्कूटी से घर तक, चित्ररेखा साहू ने ऐसे बदली अपनी जिंदगी

घर संभालने वाली महिला बनीं ‘ड्रोन दीदी’! स्कूटी से घर तक, चित्ररेखा साहू ने ऐसे बदली अपनी जिंदगी

बालोद की चित्ररेखा साहू नमो ड्रोन दीदी योजना से जुड़कर किसानों के खेतों में ड्रोन से नैनो उर्वरकों का छिड़काव कर रही है. ड्रोन दीदी बनने के बाद उनकी आय बढ़ी, स्कूटी खरीदी, घर का निर्माण पूरा कराया और बेटी की बेहतर शिक्षा का सपना मजबूत हुआ.

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घर संभालने वाली महिला बनीं ‘ड्रोन दीदी’! स्कूटी से घर तक, चित्ररेखा साहू ने ऐसे बदली अपनी जिंदगी

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की चित्ररेखा साहू की कहानी बताती है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाएं महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोल सकती हैं. कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली चित्ररेखा आज खेतों में ड्रोन उड़ाकर किसानों के लिए नैनो उर्वरकों के छिड़काव का काम कर रही हैं.उनकी इसी नई भूमिका ने उन्हें गांव और आसपास के क्षेत्र में एक अलग पहचान दी है. अब लोग उन्हें सम्मान से ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से जानते हैं.

नमो ड्रोन दीदी योजना से जुड़ने के बाद चित्ररेखा ने आधुनिक कृषि तकनीक का प्रशिक्षण लेकर ड्रोन के जरिए किसानों के खेतों में नैनो उर्वरकों के छिड़काव का काम शुरू किया. उनके लिए यह सिर्फ रोजगार का जरिया नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत भी है.

ड्रोन ने बदली जिंदगी, बढ़ा आत्मविश्वास

चित्ररेखा साहू बताती हैं कि ड्रोन दीदी बनने के बाद उन्हें खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को करीब से समझने और किसानों की मदद करने का अवसर मिला. खेतों में ड्रोन से छिड़काव करते हुए अब वह खुद को कृषि क्षेत्र में बदलाव का हिस्सा महसूस करती हैं.

उनका कहना है कि इस काम ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ समाज में एक नई पहचान भी दी है.अब किसान भी उन्हें तकनीक के जरिए खेती में मदद करने वाली महिला के रूप में पहचानते हैं.

स्कूटी खरीदी, घर का काम पूरा कराया

ड्रोन दीदी के रूप में काम शुरू करने के बाद चित्ररेखा की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ.अपनी कमाई से उन्होंने सबसे पहले स्कूटी खरीदी. इससे खेतों तक आने-जाने और काम करने में उन्हें काफी सुविधा मिली.

इसके बाद उन्होंने अपने घर का निर्माण कार्य पूरा कराया.आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ने के साथ अब वह अपनी बेटी की बेहतर शिक्षा और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए भी अधिक सक्षम महसूस करती हैं.

अब नाम के साथ जुड़ गया ‘ड्रोन दीदी’

चित्ररेखा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ आमदनी बढ़ना नहीं, बल्कि उनकी नई सामाजिक पहचान है. गांव और आसपास के इलाकों में अब लोग उन्हें चित्ररेखा साहू के साथ-साथ ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से भी पहचानते हैं.

उनके मुताबिक, यह पहचान उनके लिए सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक है. वह मानती हैं कि महिलाओं को रोजगार और तकनीक से जोड़ने वाली सरकारी योजनाएं उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दे रही हैं.

महतारी वंदन योजना से भी मिला आर्थिक सहारा

चित्ररेखा साहू ने महतारी वंदन योजना का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होती है.

उनका कहना है कि एक तरफ ड्रोन दीदी योजना ने उन्हें रोजगार और आय का अवसर दिया, वहीं महतारी वंदन योजना जैसी पहल महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल देने का काम कर रही हैं. ऐसी योजनाओं से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिलती है.

‘विष्णु भैया’ को दिया धन्यवाद

चित्ररेखा साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए महिला सशक्तिकरण के लिए संचालित योजनाओं की सराहना की. उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से महिलाओं को आगे बढ़ने, रोजगार से जुड़ने और अपने सपनों को पूरा करने के अवसर मिल रहे हैं.उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को रक्षाबंधन पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं.

चित्ररेखा की कहानी इस बात की मिसाल है कि जब महिलाओं को तकनीक, प्रशिक्षण और आर्थिक अवसर मिलते हैं, तो वे न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि आधुनिक कृषि में अपनी मजबूत पहचान भी बना सकती हैं.

 

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