राजस्थान में खाद बांटने के लिए नई व्यवस्था शुरू (AI Image)राजस्थान सरकार किसानों को समय पर और उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराने के लिए 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू कर रही है. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस डिजिटल तकनीक आधारित व्यवस्था से खाद की मांग, उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी. साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा.
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि इस प्रणाली को जुलाई में सिरोही और राजसमंद जिलों में सफलतापूर्वक लागू किया गया था. इन दोनों जिलों में अब तक 12 हजार मीट्रिक टन से अधिक खादों का वितरण 78 हजार से अधिक किसानों को किया जा चुका है. पायलट परियोजना के अच्छे रिजल्ट ने इस डिजिटल और किसान-केंद्रित व्यवस्था की उपयोगिता को साबित किया है.
उन्होंने बताया कि 25 जून से इन जिलों में लागू पायलट प्रोजेक्ट के जरिए खाद की मांग से लेकर उपलब्धता और वितरण तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी संभव हुई है. इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली कि खाद वास्तव में जरूरतमंद किसानों तक पहुंचें और वितरण में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो.
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने 25 अगस्त से बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू जिलों में भी इस व्यवस्था को लागू कर दिया है. विभाग के अनुसार जल्द ही इसे राज्य के 12 अन्य जिलों में भी शुरू किया जाएगा. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से राजस्थान के सभी जिलों को इस डिजिटल नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा.
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रणाली को लागू करने पर सिरोही और राजसमंद जिलों में करीब 175 करोड़ रुपये का इंसेंटिव मिला है. वहीं पूरे राज्य में व्यवस्था लागू होने के बाद लगभग 675 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इंसेंटिव मिलने की संभावना है.
नए सिस्टम की सबसे खास विशेषता यह है कि किसान अपनी जरूरत के अनुसार पहले खाद की बुकिंग कर सकेंगे. बुकिंग के बाद उन्हें 48 घंटे के लिए वैध एक टोकन जारी किया जाएगा. इस टोकन के आधार पर किसान अपने नजदीकी अधिकृत विक्रेता से खाद हासिल कर सकेंगे.
यदि कोई किसान तय समयावधि के भीतर खाद नहीं लेता है, तो उसे दोबारा बुकिंग करनी होगी. विभाग का मानना है कि इससे वास्तविक जरूरत वाले किसानों को प्राथमिकता मिलेगी और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी.
अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक आधारित व्यवस्था किसानों को यह जानकारी भी देगी कि उन्हें खाद कहां से और किस प्रक्रिया के जरिए प्राप्त करनी है. इससे किसानों का समय और श्रम दोनों बचेंगे. साथ ही डिजिटल निगरानी के माध्यम से खाद की मांग, उपलब्ध स्टॉक और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी, जिससे आपूर्ति और मांग के बीच बेहतर संतुलन बनेगा.
राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से खाद वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. साथ ही खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी जैसी समस्याओं पर भी काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा.
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