ये सभी महिलाएं पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर अपना रही हैंउत्तर प्रदेश के गावों में खेती-किसानी में बड़ा बदलाव हो रहा है. यहां की महिला किसान पारंपरिक खेती के इतर पौष्टिक सब्जियों के उत्पादन को बढ़ावा दे रही हैं. यह कहानी ऐसे महिलाओं की है, जो पारंपरिक खेती को छोड़कर रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर खेती को अपनाते हुए लाखों लोगों तक पौष्टिक सब्जियां पहुंचा रही हैं. इसी क्रम में यूपी के श्रावस्ती जिले के हरिहरपुर रानी गांव में करीब 30,000 महिला किसान खाद्य सुरक्षा की एक नई कहानी लिख रही हैं. वे तरह-तरह की पौष्टिक सब्जियां उगा रही हैं, जिनसे हर दिन 1 लाख से ज्यादा लोगों को पोषण मिल रहा है. वहीं महिला किसानों को सरकारी योजनाओं की भी पूरी मदद मिल रही है. खेती की क्रांति को देखकर महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी मुरीद हो गए हैं.
पुनर्योजी कृषि खेती का एक टिकाऊ मॉडल है, जहां रसायन का उपयोग कम होता है. इस तरह मिट्टी का स्वास्थ्य भई बेहतर होता है. इस मॉडल में पशुधन को जोड़कर और कम जुताई जैसे तरीके भी अफनाए जाती है. इस मॉडल से उपजी फसल भी अधिक गुणवत्ता रखती है.
साहसी महिला किसानों को नंदी इंडिया फाउंडेशन का साथा मिला है. इस फाउंडेशन ने महिलाओं को ट्रेनिंग देने का भी काम किया है. अब वह अब कहीं अधिक शक्तिशाली रूप ले चुका है.
महिलाएं आत्मविश्वास से खाद्य उत्पादक और उद्यमी बन रही हैं. उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने हरिहरपुर रानी गांव में आयोजित एक फूड फेस्टिवल का भी जिक्र किया. इस उत्सव में खेती के कई सफल सीजनों का जश्न मनाया गया.
महिला किसानों को उनके शानदार काम के लिए पुरस्कार दिए गए, लेकिन महिंद्रा के मुताबिक इस कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण व्यंजनों को चखने वाली मेज थी.
इस मेज पर ताजी गाजर, चुकंदर और स्वाद से भरी पुदीने की चटनी रखी गई थी. आनंद महिंद्रा ने लिखा कि यह इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब मिट्टी का सम्मान किया जाता है, तो पोषण और आजीविका दोनों एक साथ फलते-फूलते हैं. जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़े और उत्पादों की बाजार में अच्छी कीमत मिले.
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