Animal Care in Summer: गर्मियों में पशुओं को होने लगती है पानी की कमी, ऐसे करें पहचान

Animal Care in Summer: गर्मियों में पशुओं को होने लगती है पानी की कमी, ऐसे करें पहचान

Animal Care in Summer पशु के बीमार होने पर दूध उत्पादन कम हो जाता है. बीमारी पर इलाज में पैसा भी खर्च करना पड़ता है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गर्मियों में पानी की कमी के चलते पशुओं को सबसे बड़ी डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रैस जैसी बीमारी का सामना करना पड़ता है. इसलिए गर्मियों में पशुओं को हरा चारा खूब खि‍लाना चाहिए. एक किलो हरे चारे से तीन से चार लीटर तक पानी की कमी पूरी हो जाती है.

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Animal Care in Summer: गर्मियों में पशुओं को होने लगती है पानी की कमी, ऐसे करें पहचानभैंस की टॉप 4 नस्लें

फरवरी महीना खत्म होने को है. मार्च से गर्मियों की शुरुआत हो जाएगी. गर्मियों के दौरान इंसान हो या फिर पशु, सभी को पानी की जरूरत होती है. गर्मियों के दौरान गला सूखने लगता है. शरीर में भी पानी की कमी होने लगती है. पशुओं के लिए ये वो वक्त होता है जब चारे और पानी का महत्व एक जैसा हो जाता है. पशुओं को जितनी जरूरत चारे की होती है, उतनी ही गर्मियों में पानी की भी होती है. अगर पानी पिलाने में जरा सी भी लापरवाही हुई तो इसके चलते पशुओं की जान पर भी बन आती है. पशु तनाव में आ जाता है. जिसका सीधा असर पशु के उत्पादन पर पड़ता है.  

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गर्मी में पशुओं के लिए साफ और ताजा पानी पीना बहुत जरूरी है. पानी ना पीने पर किस तरह की परेशानी हो सकती है, पानी की कमी के लक्षण पशु के शरीर पर दिखाई दे जाते हैं. पानी की कमी के कई नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. लेकिन, अगर पानी का ख्याल रखा जाए तो पशु को बीमार होने और उत्पादन कम होने के नुकसान से बचा जा सकता है.  

पशुओं में पानी की कमी के ये हैं लक्षण 

जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है. 

कम पानी पिलाने के ये हैं नुकसान 

पानी की कमी होने पर पशुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे चारा खाने और उसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. शरीर के जरूरी पोषक तत्वा मल-मूत्र के जरिए बाहर निकलने लगते हैं. पशुओं की दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ने लगता है. खून गाढ़ा होने लगता है. बछड़े और बछड़ियों को पेचिस लग जाती है. बड़े पशुओं को दस्त लग जाते हैं.

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