सब्जियों से 'खतरनाक आर्सेनिक' घटाने की पहलबिहार सरकार ने पत्तेदार और जड़ वाली सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, राज्य सरकार ने कुछ जिलों में पत्तेदार और जड़ वाली सब्जियों में बढ़ते आर्सेनिक लेवल (एक अत्यधिक विषैला और गंधहीन केमिकल) से निपटने के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट के साइंटिस्ट और अधिकारियों को शामिल करने का फैसला किया है. इस बात कि जानकारी रविवार को अधिकारियों ने दी.
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने PTI को बताया कि राज्य सरकार प्रभावित इलाकों में किसानों के लिए एक जागरूकता अभियान शुरू करने की भी योजना बना रही ,है ताकि उन्हें सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताया जा सके. राम कृपाल यादव ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि आर्सेनिक से दूषित ग्राउंडवाटर की वजह से राज्य के कुछ हिस्सों में पत्तेदार सब्जियों, जड़ वाली सब्जियों, जिनमें आलू भी शामिल हैं, और खेती से जुड़े दूसरे उत्पादों में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ गई है. यह एक गंभीर चिंता की बात है.
उन्होंने कहा कि सब्जियों में आर्सेनिक की मात्रा कम करने के लिए पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग (PHED), हेल्थ और माइनर वाटर रिसोर्सेज डिपार्टमेंट के साइंटिस्ट और अधिकारियों की मदद ली जाएगी. बिहार एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक, पत्तेदार सब्जियों में आर्सेनिक की मात्रा 0.1 mg प्रति kg, आलू समेत जड़ वाली सब्जियों में 0.3 mg प्रति kg और धान की फसलों में 1.0 mg प्रति kg दर्ज की गई है.
बिहार के PHED मिनिस्टर संजय कुमार सिंह ने हाल ही में राज्य विधानसभा को बताया था कि 14 जिलों में ग्राउंडवाटर में आर्सेनिक, 11 जिलों में फ्लोराइड और 12 जिलों में आयरन पाया गया है. उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में नाइट्रेट का लेवल भी तय स्टैंडर्ड से ज़्यादा हो गया है, जिससे हैंडपंपों पर लाल रंग से निशान लगाकर लोगों को पीने के लिए पानी इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी गई है.
संजय कुमार सिंह ने बताया कि राज्य सरकार 'हर घर नल का जल' स्कीम के तहत साफ पीने का पानी दे रही है, और किसानों को खेती के लिए साफ पानी सप्लाई करने के दूसरे तरीकों की प्लानिंग कर रही है. पानी की क्वालिटी की रेगुलर जांच की जा रही है, और पीने के पानी की सप्लाई से जुड़ी शिकायतों को दूर करने के लिए टोल-फ्री और WhatsApp नंबर जारी किए गए हैं. उन्होंने कहा कि आर्सेनिक की स्वीकार्य सीमा 0.01 mg प्रति लीटर और फ्लोराइड 1.0 mg प्रति लीटर है. इन सीमाओं से ज़्यादा होने पर हड्डियों में फ्लोरोसिस और दांतों में सड़न जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, सुरक्षित पानी पक्का करने के लिए 4,709 वार्डों में आर्सेनिक प्यूरिफिकेशन इक्विपमेंट लगाए गए हैं.
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