बादाम के फूलइस साल फरवरी में ही देश के कई हिस्सों में मौसम में समय से पहले ही बदलाव देखने को मिल रहा है. कई जगहों पर समय से पहले तापमान में बढ़ोतरी हुई है. ऐसा ही कश्मीर में भी देखने को मिल रहा है. जहां कुछ ही दिन पहले तक हर तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई थी. वहां, जैसे-जैसे बर्फ पिघली, मौसम भी बदलने लगा. जो पेड़ पूरी तरह बर्फ से ढके हुए थे, वे अब फूलों से भरे नजर आ रहे हैं. इस वजह से कश्मीर के मशहूर बादाम के फूल इस साल पहले आ गए हैं, जिससे घाटी फरवरी के तीसरे हफ्ते में सफेद और गुलाबी रंग की हल्की छटाओं में रंग गई है.
आमतौर पर इस लंबे समय से इंतज़ार किए जाने वाले फूल मार्च के पहले हफ्ते में खिलना शुरू होते हैं, जो सर्दी से बसंत के आने का संकेत देते हैं. लेकिन इस बार फूल जल्दी आने से लोगों, किसानों और मौसम विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है. बताया जा रहा है कि सर्दियों में तापमान ज्यादा रहने और बर्फ कम गिरने की वजह से फूल जल्दी आ गए हैं. घाटी में बादाम के फूल बसंत की पहली निशानी माने जाते हैं, लेकिन इस बार ये करीब दो हफ्ते पहले ही दिखाई दे गए.
जहां जल्दी खिलने वाले फूलों ने प्रकृति के नजारे को देखने के लिए उत्सुक लोगों को आकर्षित किया है, वहीं इस घटना ने बागवानों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जानकारों का कहना है कि अगर दोबारा ठंड बढ़ी या पाला पड़ा, तो इन नाजुक फूलों को नुकसान हो सकता है. इससे आगे चलकर फलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है.
समय से पहले खिले ये फूल एक तरफ देखने में बहुत सुंदर हैं, लेकिन साथ ही यह भी दिखाते हैं कि इलाके में मौसम का पैटर्न बदल रहा है. हिमालयी क्षेत्र में यह बदलाव अब साफ नजर आने लगा है. आमतौर पर कश्मीर में मेवों के पेड़ों में खासकर बादाम और चेरी ब्लॉसम मार्च के पहले हफ्ते में खिलते हैं. लेकिन इस बार फरवरी के तीसरे हफ्ते में ही इनका खिलना शुरू हो गया है. समय से पहले आई यह बहार किसानों के लिए चिंता का कारण बन रही है.
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