पंजाब में गेहूं खरीद का क्या है आंकड़ा. (सांकेतिक फोटो)पंजाब ने राष्ट्रीय पूल में खाद्यान्न योगदान में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है. 24 मई तक देश भर से खरीदे गए कुल गेहूं का 47.29 फीसदी हिस्सा पंजाब का है. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर देश में खरीदे गए कुल 262.62 लाख मीट्रिक टन गेहूं में से पंजाब ने 124.21 लाख मीट्रिक टन गेहूं का योगदान दिया है. खाद्य निगम पर अपलोड किए गए रबी विपणन सीजन (आरएमएस) 2024-25 के खरीद आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में 71.12 लाख मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश में 48.04 लाख मीट्रिक टन, राजस्थान में 10.13 लाख मीट्रिक टन और उत्तर प्रदेश में 8.96 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है. वहीं, कुछ छोटी मात्रा बिहार और हिमाचल प्रदेश से भी खरीदी गई है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल 18,57,780 किसानों ने 54,182 करोड़ रुपये गेहूं एमएसपी पर बेचा है, जबकि पंजाब के 7,58,143 किसानों को 27,477 करोड़ रुपये का एमएसपी मिला है. आरएमएस 2022-23 में, मार्च में हीटवेव के कारण उपज और उत्पादन में कमी के बावजूद पंजाब ने चालू सीज़न से अधिक योगदान दिया. जब फसल पकने की अवस्था में थी तो इसके दाने सिकुड़ गए थे. देश भर में केवल 187.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी, जिसमें पंजाब का योगदान 96.45 लाख मीट्रिक टन था, जो कुल खरीद का लगभग 51.32 फीसदी था.
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आरएमएस 2021-22 में कुल 433.44 लाख मीट्रिक टन में से अधिकतम 132.22 लाख मीट्रिक टन के बावजूद पंजाब का योगदान पिछले कई वर्षों में सबसे निचले स्तर 30.50 फीसदी पर था. साल 2020-21 में, मध्य प्रदेश ने पहली बार पंजाब को हराया, क्योंकि उसने राष्ट्रीय पूल में 129.42 लाख मीट्रिक टन का योगदान दिया, जबकि पंजाब का आंकड़ा 127.14 लाख मीट्रिक टन था.
पंजाब राज्य कृषि विपणन बोर्ड (पीएसएएमबी) ने कहा है कि 25 मई तक मंडियों में 131.9 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जो उसके 132 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के करीब है. निजी व्यापारियों ने 7.69 लाख मीट्रिक टन खरीदा है. वहीं, किसान संगठन बीकेयू (एकता उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि कोई भी पंजाब को गेहूं और धान पर एमएसपी का लाभ मिलने के बारे में डेटा देख सकता है, लेकिन हम केवल पंजाब या हरियाणा के किसानों के बारे में चिंतित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के किसानों को एमएसपी का लाभ दिलाने के लिए लड़ रहे हैं. कई जगहों पर एमएसपी के अभाव में किसान अपनी फसल कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं. हमारी लड़ाई इस लूट के खिलाफ है.
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