बारिश से गेहूं की फसल को काफी फायदा हुआ है. (सांकेतिक फोटो)हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में गेहूं उत्पादक किसानों को इस साल मौसम ने पूरा साथ दिया. जनवरी में लगभग पूरे महीने शीतलहर और कोहरे का प्रकोप रहा, जो गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद रहा. इससे गेहूं की ग्रोथ तेजी से हुई. वहीं, फरवरी महीने की शुरुआत में ही इन तीनों राज्यों में अच्छी बारिश हो गई, जो रबी फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. ऐसे में किसान अब गेहूं की पैदावार में कम से कम 10 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं. वहीं, कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि फरवरी और मार्च महीने तक रबी फसल के लिए अनुकूल नमी रहती है, तो गेहूं के लिए और अच्छा होगा. क्योंकि इसी दौरान गेहूं की बालियों में अनाज के दाने भरते हैं. अगर तापमान में बढोतरी होती है, तो उत्पादन प्रभावित भी हो सकता है.
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 15 दिनों में अगर एक- दो बार बारिश हो जाती है, तो गेहूं के लिए फायदेमंद होगा. वहीं, किसानों को सिंचाई पर होने वाले खर्चे से भी राहत मिलेगी. हरियाणा के एक किसान आरएस राणा ने कहा कि उन्होंने पूसा 1718 को अपनाने का फैसला किया और अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में ही इसकी बुवाई कर दी थी. ऐसे में इस बार अच्छी उपज की उम्मीद है. वहीं, पंजाब के लुधियाना के अमरीक सिंह ढिल्लों ने कहा कि उन्होंने फिर से पीबीडब्ल्यू 826 किस्म की बुआई की है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार पिछले साल 25 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक उपज मिलेगी.
इसी तरह राजस्थान में हनुमानगढ़ के अशोक सिंह और श्री गंगानगर के सुखविदर पाल सिंह भी खुश हैं और उन्हें गेहूं की अच्छी फसल की उम्मीद है. दोनों ने कहा कि हमारे क्षेत्र में, कुछ किसानों ने कपास उखाड़ने के बाद 20 दिसंबर तक भी गेहूं की बुआई की. हालांकि अधिकांश बुआई नवंबर के पहले सप्ताह के बाद शुरू हुई. पाल सिंह ने कहा कि 7 नवंबर से पहले बोई गई फसल में बालियां आना शुरू हो गई हैं. कृषि मंत्रालय ने शुक्रवार को 2023-24 सीजन के लिए सभी रबी फसलों की अंतिम बुआई के आंकड़े जारी किए. इस साल गेहूं का रकबा 2022-23 में 339.20 लाख हेक्टेयर की तुलना में 341.57 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है.
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खास बात यह है कि गेहूं के सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 101.41 लाख हेक्टेयर की बुआई दर्ज की गई है, जो पिछले साल से 4 प्रतिशत से अधिक है. इसी तरह राजस्थान और महाराष्ट्र में कम कवरेज की भरपाई करने में मदद मिली है. पंजाब और हरियाणा में रकबा पिछले साल के लगभग बराबर है. सरकार ने इस साल गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 114 मिलियन टन तय किया है.
साथ ही कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि 2023-24 फसल वर्ष के दौरान सभी रबी फसलों के तहत बोया गया क्षेत्र 709.29 लाख हेक्टेयर पर समाप्त हुआ, जो 2022-23 के दौरान 709.09 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है. सर्दियों में उगाई जाने वाली दालों का रकबा 166.19 लाख हेक्टेयर की तुलना में 160.08 लाख हेक्टेयर था. जबकि चने का रकबा 110.71 लाख हेक्टेयर से घटकर 104.74 लाख हेक्टेयर रह गया है. लेकिन मसूर का रकबा 18.52 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 19.57 लाख हेक्टेयर रह गया है.
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2022-23 की इसी अवधि में सरसों का रकबा 97.97 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 100.44 लाख हेक्टेयर था. सभी रबी तिलहनों का रकबा 110.96 लाख हेक्टेयर बताया गया है, जो एक साल पहले 109.76 लाख हेक्टेयर था. हालांकि, मूंगफली क्षेत्र 5.68 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.88 लाख हेक्टेयर पर बंद हुआ. शीतकालीन धान का रकबा एक साल पहले के 40.37 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 39.29 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. मोटे अनाजों में, बुआई क्षेत्र 53.57 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.38 लाख हेक्टेयर हो गया है. वहीं, ज्वार का रकबा 22.37 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 25.17 लाख हेक्टेयर और मक्के का रकबा 22.62 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 23.08 लाख हेक्टेयर हो गया है. जौ की बुआई भी 7.57 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.21 लाख हेक्टेयर हो गई है.
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