उत्तराखंड HC का बड़ा फैसला: किसानों को मिली राहत, धान की नर्सरी पर रोक हटी

उत्तराखंड HC का बड़ा फैसला: किसानों को मिली राहत, धान की नर्सरी पर रोक हटी

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य के धान किसानों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. कोर्ट ने बिना अनुमति वाली गर्मियों की धान की नर्सरियों को नष्ट करने के प्रशासनिक आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है.

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उत्तराखंड HC का बड़ा फैसला: किसानों को मिली राहत, धान की नर्सरी पर रोक हटीधान किसानों को मिली राहत

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने किसानों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, कोर्ट ने ऊधम सिंह नगर जिले के किसानों को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने बिना अनुमति वाली गर्मियों की धान की नर्सरियों को नष्ट करने के प्रशासनिक आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है. जस्टिस पंकज पुरोहित ने इस मामले में गदरपुर तहसील के किसानों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला ऊधम सिंह नगर जिले से जुड़ा है. यहां जिला प्रशासन ने 4 फरवरी को आदेश दिया था कि बिना अनुमति के तैयार की गई धान की नर्सरियों को नष्ट कर दिया जाए. साथ ही कहा गया था कि धान की खेती सिर्फ जलभराव वाले क्षेत्रों में ही की जाए, ताकि गिरते हुए जलस्तर का ध्यान रखा जाए.

किसानों ने क्या कहा?

गदरपुर तहसील के किसानों ने इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर किया, जिसमें किसानों का कहना था कि उनकी जमीन अलग-अलग जगहों पर है और सभी जमीनें जलभराव वाली नहीं हैं. ऐसे में इस तरह का आदेश उनके अधिकारों का उल्लंघन है और इसके लिए कोई साफ कानूनी नियम भी नहीं है. वहीं, मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज पुरोहित ने कहा कि अगली सुनवाई तक किसानों को धान की नर्सरी तैयार करने और खेती जारी रखने की अनुमति रहेगी.

कब होगी अगली सुनवाई?

बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी. तब तक किसान अपनी खेती जारी रख सकते हैं. कुल मिलाकर, कोर्ट के इस फैसले से किसानों को बड़ी राहत मिली है और वे फिलहाल बिना किसी रोक-टोक के अपनी फसल तैयार कर सकेंगे, जो प्रशासनिक आदेश के चलते अपनी फसल को लेकर असमंजस की स्थिति में थे. बता दें कि धान की खेती में काफी ज्यादा पानी की जरूरत होती है. प्रशासन का कहना था कि बेमौसमी धान की सिंचाई के लिए किसानों को लगातार नलकूपों से पानी निकालना पड़ता है, जिससे भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है.

इतने हेक्टेयर में होती है खेती

उधम सिंह नगर जिले में, ग्रीष्मकालीन धान (बेमौसमी) की खेती लगभग 20,000 से 22,000 हेक्टेयर भूमि पर की जाती थी, जो मुख्य रूप से तराई क्षेत्र में केंद्रित है. लेकिन भूजल संकट के कारण प्रशासन ने किसानों को धान के बजाय कम पानी वाली फसलें जैसे मक्का, गन्ना, दालें, और सब्जियां उगाने की सलाह दी है. (PTI)

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