रबी MSP पर भड़का SKM, गेहूं के दाम में 25 रुपये बढ़ोतरी को बताया किसानों का अपमान

रबी MSP पर भड़का SKM, गेहूं के दाम में 25 रुपये बढ़ोतरी को बताया किसानों का अपमान

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 2027-28 के रबी MSP को किसानों के लिए नाकाफी बताया है. गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी पर संगठन ने नाराजगी जताई. SKM ने C2+50% की कानूनी गारंटी, फसलों की सरकारी खरीद और राज्यों को बोनस देने की आजादी की मांग की है. साथ ही गांवों में MSP आदेश की प्रतियां जलाने का आह्वान किया.

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रबी MSP पर भड़का SKM, गेहूं के दाम में 25 रुपये बढ़ोतरी को बताया किसानों का अपमानरबी MSP पर किसानों का गुस्सा (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 2027-28 के लिए घोषित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. SKM ने गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए इसे किसानों का अपमान करार दिया है. किसान संगठन ने देश के गांवों में रबी MSP के आदेश की प्रतियां जलाने और जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है.

गेहूं के MSP में 25 रुपये की बढ़ोतरी पर SKM नाराज

SKM के मुताबिक, सरकार ने गेहूं के MSP में सिर्फ 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है. यानी किसानों को प्रति किलो गेहूं पर सिर्फ 25 पैसे ज्यादा मिलेंगे. संगठन का कहना है कि आज के समय में 25 पैसे की बढ़ोतरी से किसान की बढ़ती खेती लागत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा. SKM ने कहा कि डीजल, मजदूरी, बीज, खाद और दूसरी चीजों की कीमत लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में गेहूं के दाम में इतनी कम बढ़ोतरी किसानों के लिए राहत नहीं है. संगठन ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया है, जिसमें रबी MSP को लागत से 106 प्रतिशत अधिक बताया गया है.

SKM ने '106 प्रतिशत मुनाफे' के दावे पर उठाए सवाल

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार जिस लागत के आधार पर 106 प्रतिशत का मार्जिन बता रही है, उसमें खेती की पूरी लागत शामिल नहीं है. सरकार की लागत गणना में किसान की जेब से होने वाला खर्च और परिवार के लोगों की मेहनत का मूल्य शामिल किया जाता है, लेकिन अपनी जमीन के किराए और अपनी पूंजी पर ब्याज जैसी लागत को इसमें शामिल नहीं किया जाता. SKM के अनुसार, खेती की पूरी लागत को C2 कहा जाता है. किसान संगठन का कहना है कि स्वामीनाथन आयोग ने C2 लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर MSP तय करने की सिफारिश की थी. संगठन के मुताबिक, सरकार के कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के आंकड़ों से भी अगर पूरी लागत को आधार बनाया जाए तो गेहूं पर मुनाफा 106 प्रतिशत नहीं, बल्कि करीब 43 प्रतिशत ही बैठता है.

महाराष्ट्र में गेहूं की खेती पर घाटे का दावा

SKM ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले सीजन में CACP ने वहां गेहूं की पूरी लागत करीब 3,091 रुपये प्रति क्विंटल बताई थी. वहीं गेहूं का MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल था. संगठन के मुताबिक, इस हिसाब से किसान को हर क्विंटल पर करीब 481 रुपये का नुकसान होता है. SKM का दावा है कि इस नुकसान के साथ किसानों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ रहा है. संगठन के अनुसार, महाराष्ट्र में सिर्फ रबी फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर करीब 31,593 रुपये की ऋण देनदारी है. ऐसे में किसान संगठन का कहना है कि MSP में मामूली बढ़ोतरी किसानों की आर्थिक परेशानी को दूर नहीं कर सकती.

राज्यों की MSP सिफारिशों को नहीं माना गया

SKM ने यह भी आरोप लगाया कि रबी फसलों की कीमत तय करते समय राज्यों की सिफारिशों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया. संगठन के मुताबिक, पिछले सीजन में महाराष्ट्र ने गेहूं के लिए 4,525 रुपये प्रति क्विंटल, गुजरात ने 4,200 रुपये, पश्चिम बंगाल ने 3,450 रुपये और पंजाब ने 3,168 रुपये की मांग की थी. हरियाणा ने भी गेहूं के लिए 2,652 रुपये प्रति क्विंटल की मांग की थी, जो घोषित MSP से अधिक थी. SKM का कहना है कि राज्यों की अलग-अलग मांगों को नजरअंदाज करना किसानों के हित में नहीं है. संगठन ने इसे केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों से जुड़ा मुद्दा भी बताया है.

बोनस को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल

SKM ने कहा कि जनवरी 2026 में वित्त मंत्रालय ने राज्यों से गेहूं और धान पर दिए जाने वाले बोनस को बंद करने पर विचार करने को कहा था. संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार राज्यों को किसानों को अतिरिक्त बोनस देने से रोकना चाहती है. किसान संगठन ने इसे लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाया है. SKM का कहना है कि अगर राज्य अपने किसानों को बेहतर कीमत देना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए.

डीजल और मजदूरी की बढ़ती लागत का भी मुद्दा

SKM ने खेती की बढ़ती लागत को लेकर डीजल की कीमतों का भी जिक्र किया है. संगठन के मुताबिक, मई में सिर्फ 10 दिनों के अंदर डीजल की कीमत में चार बार बढ़ोतरी हुई और इससे करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक का फर्क पड़ा. किसानों के लिए ट्रैक्टर, पंपसेट और सिंचाई जैसे कामों में डीजल जरूरी है. इसके अलावा मजदूरी भी बढ़ रही है. SKM का कहना है कि जब खेती की लागत तेजी से बढ़ रही है तो MSP तय करते समय इन बढ़ी हुई लागतों को सही तरीके से शामिल किया जाना चाहिए.

सरकारी खरीद नहीं हुई तो MSP का क्या फायदा?

SKM ने सरकारी खरीद को भी बड़ा मुद्दा बताया है. संगठन के अनुसार, 2025-26 में गेहूं की कुल फसल का केवल करीब एक चौथाई हिस्सा ही सरकारी खरीद के दायरे में आया. किसान संगठन का कहना है कि अगर किसान अपनी फसल MSP पर बेच ही नहीं पा रहा है तो कागज पर MSP तय करने का फायदा किसानों को नहीं मिलेगा. SKM ने हर राज्य में हर फसल की सरकारी खरीद की व्यवस्था करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि MSP को प्रभावी बनाने के लिए केवल कीमत घोषित करना काफी नहीं है, बल्कि किसानों को उस कीमत पर अपनी फसल बेचने का मौका भी मिलना चाहिए.

SKM ने MSP में तत्काल बढ़ोतरी की मांग की

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार से रबी फसलों के MSP में तत्काल बदलाव करने की मांग की है. संगठन चाहता है कि गेहूं का MSP कम से कम 3,418 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए. इसके अलावा जौ के लिए 3,518 रुपये, चने के लिए 9,205 रुपये, मसूर के लिए 9,947 रुपये, राई और सरसों के लिए 8,684 रुपये और कुसुम के लिए 10,630 रुपये प्रति क्विंटल का MSP तय किया जाए. SKM की सबसे बड़ी मांग MSP को C2 लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे के साथ कानूनी गारंटी देने की है. संगठन का कहना है कि MSP केवल सरकारी घोषणा नहीं होनी चाहिए, बल्कि किसानों को कानूनी तौर पर इसका लाभ मिलना चाहिए.

गांवों में MSP आदेश की प्रतियां जलाने का आह्वान

SKM ने किसानों और ग्रामीण युवाओं से 2027-28 के रबी MSP के आदेश की प्रतियां गांव-गांव में जलाने का आह्वान किया है. संगठन ने कहा कि किसान पहले भी अपने अधिकारों के लिए बड़े आंदोलन कर चुके हैं और अब MSP की कानूनी गारंटी के लिए भी आंदोलन जारी रहेगा. SKM ने अपने घटक संगठनों और ग्रामीण भारत के युवाओं से अपील की है कि वे MSP आदेश को पढ़ें, इसकी प्रतियां जलाएं और जिला मुख्यालयों पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों में शामिल हों. संगठन का कहना है कि यह लड़ाई केवल फसल की कीमत की नहीं, बल्कि किसानों के परिवार और ग्रामीण युवाओं के भविष्य की भी है.

पांच साल पुराने आश्वासन का SKM ने उठाया मुद्दा

SKM ने कहा कि 9 दिसंबर 2021 को केंद्र सरकार ने MSP को लेकर संगठन को लिखित आश्वासन दिया था. संगठन का कहना है कि करीब पांच साल बाद भी किसानों को उनकी मांग के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी नहीं मिली है. SKM ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान किसानों ने उन कानूनों की प्रतियां जलाई थीं और आखिरकार सरकार को कानून वापस लेने पड़े थे. अब संगठन ने MSP के नए आदेश के खिलाफ भी इसी तरह विरोध करने का आह्वान किया है. किसान संगठन ने साफ किया है कि C2+50 प्रतिशत की कानूनी गारंटी वाला MSP मिलने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा.

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