नर्सरी उद्योग पर संकटकश्मीर घाटी में इस बार मौसम सामान्य नहीं है. यहां तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है और बारिश भी बहुत कम हुई है. इसका सीधा असर पौध तैयार करने वाली नर्सरियों पर पड़ा है. मौसम की इन परिस्थितियों के कारण नर्सरियों में पौधों की सही तरीके से बढ़वार नहीं हो पा रही है. इससे किसानों को नए पेड़ लगाने में भी परेशानी हो रही है और कई किसान फिलहाल पौधरोपण टाल रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह गर्मी ज्यादा रही और बारिश कम हुई तो नर्सरी में तैयार होने वाले पौधों की संख्या कम हो सकती है. इससे कश्मीर के करीब 100 करोड़ रुपये के नर्सरी उद्योग को बड़ा नुकसान होने की आशंका है. नर्सरी संचालकों और किसानों का कहना है कि मौसम में आए इस बदलाव के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.
मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कश्मीर घाटी में इस साल फरवरी के मध्य से दिन का तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है. यह तापमान इस समय के सामान्य तापमान से करीब 11 डिग्री ज्यादा है. इसके साथ ही इस बार घाटी में बारिश भी बहुत कम हुई है. मौसम के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी महीने में श्रीनगर में सिर्फ 5.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो साल 1960 के बाद फरवरी महीने में दर्ज हुई सबसे कम बारिश मानी जा रही है.
मौसम में आए इस असामान्य बदलाव का असर खेती और बागवानी पर भी पड़ रहा है. खासकर इससे पौधरोपण का मौसम प्रभावित हुआ है. कई किसान नए पौधे लगाने में देरी कर रहे हैं. इसका सबसे ज्यादा असर सेब के बागों पर पड़ सकता है, क्योंकि सेब की खेती कश्मीर की बागवानी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है. अगर मौसम इसी तरह असामान्य बना रहा तो सेब की नई पौध लगाने और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है.
नर्सरी मालिकों का कहना है कि इस वर्ष पौधों की बिक्री में काफी गिरावट आई है क्योंकि किसान शुष्क मिट्टी और सामान्य से अधिक गर्म परिस्थितियों में बुवाई करने को लेकर सतर्क हैं. श्रीनगर से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कुलगाम जिले के क़ैमोह ब्लॉक में इंसाफ़ नर्सरी के मालिक ज़ाहिद भट ने कहा कि इस मौसम में उनकी बिक्री में लगभग 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि किसान पौधों नहीं खरीद रहे हैं. क़ैमोह घाटी के सबसे बड़े नर्सरी केंद्रों में से एक है, जहां 400 से अधिक नर्सरियां हैं जो पूरे कश्मीर में पौधों की आपूर्ति करती हैं. स्थानीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपनी आजीविका के लिए नर्सरी की खेती, मुख्य रूप से सेब के पौधों पर निर्भर है.
नर्सरी उत्पादकों का कहना है कि तापमान में अचानक हुई वृद्धि से रोपण मुश्किल हो गया है और सामान्य मौसमी चक्र बाधित हो गया है. एक नर्सरी मालिक ने कहा कि उन्होंने कई दशकों में तापमान में इतनी अचानक वृद्धि नहीं देखी है. जलवायु परिवर्तन के कारण पौधारोपण बहुत मुश्किल हो गया है. उन्होंने बताया कि वे आमतौर पर मार्च के पहले सप्ताह तक अपना अधिकांश स्टॉक बेच देते हैं. लेकिन इस साल उनका लगभग 40 प्रतिशत स्टॉक अभी भी बिना बिका है.
कश्मीर में पौधरोपण का मौसम आमतौर पर फरवरी के मध्य में शुरू होता है और मार्च के दूसरे सप्ताह तक चलता है, जब किसान अपने बागों का विस्तार या नवीनीकरण करने के लिए छोटे पौधे लगाते हैं. लेकिन इस साल किसानों का कहना है कि मिट्टी में नमी की कमी भी एक बड़ी चिंता का विषय है. शोपियन के बाग क्षेत्र के सेब उत्पादक तारिक अहमद मीर ने कहा कि सूखे की स्थिति किसानों को नए पेड़ लगाने से हतोत्साहित कर रही है.
मीर ने कहा कि मिट्टी में नमी बहुत कम है. अगर अभी नए पौधे भी लगाए जाएं, तो दिन के अत्यधिक तापमान के कारण उनके जीवित रहने की संभावना कम है. मध्य और उत्तरी कश्मीर के बागवानी विशेषज्ञों ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि असामान्य मौसम के कारण इस मौसम में पौधारोपण पहले ही बाधित हो चुका है. कई किसान अब नए पेड़ लगाने का निर्णय लेने से पहले बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
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