पंजाब-हरियाणा में किसानों के लिए वरदान हैं ये धान की 5 पछेती किस्में, कम समय में देंगी बंपर पैदावार

पंजाब-हरियाणा में किसानों के लिए वरदान हैं ये धान की 5 पछेती किस्में, कम समय में देंगी बंपर पैदावार

पंजाब और हरियाणा में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए ये अच्छी खबर है. अगर किसी वजह से धान की रोपाई में देरी हो गई है, तो किसान पछेती किस्मों की खेती कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. बदलते मौसम और बढ़ती लागत के बीच ये धान की किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं.

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पंजाब-हरियाणा में किसानों के लिए वरदान हैं ये धान की 5 पछेती किस्में, कम समय में देंगी बंपर पैदावारधान की 5 पछेती किस्में

देश के ज्यादातर राज्यों में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की रोपाई शुरू हो चुकी है. वहीं, पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में भी किसान खेतों में धान की रोपाई में जुट गए हैं. हालांकि, कई किसान अभी तक किसी कारणवश धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं और अब ऐसी किस्मों की तलाश कर रहे हैं, जो देर से लगाने के बाद भी कम समय में तैयार हो जाएं और अच्छा उत्पादन दें. बता दें कि धान की खेती में पानी की अधिक जरूरत होती है, ऐसे में पंजाब और हरियाणा के किसान धान की ये 5 पछेती किस्मों की खेती कर सकते हैं, जो कम अवधि में पकने के साथ बेहतर पैदावार भी देंगे. आइए जानते हैं पंजाब और हरियाणा में बोई जाने वाली इन उन्नत पछेती धान किस्मों के बारे में.

पछेती धान की 5 खास किस्में

1. पीआर 131 धान किस्म: पंजाब और हरियाणा के किसानों के बीच पीआर 131 धान किस्म काफी लोकप्रिय हो रही है. यह मध्यम अवधि की किस्म है, जो करीब 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है. इस किस्म की खासियत यह है कि इसमें दाने की क्वालिटी अच्छी होती है और बाजार में इसकी मांग बनी रहती है. इसके पौधे मजबूत होते हैं और गिरने की संभावना कम रहती है. सही प्रबंधन के साथ किसान इससे औसत पैदावार लगभग 31 क्विंटल प्रति एकड़ ले सकते हैं.

2. बासमती 1509 धान किस्म: धान की पछेती रोपाई के लिए बासमती 1509 भी किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प है. यह कम अवधि में तैयार होने वाली सुगंधित किस्म है. इसकी सबसे बड़ी खासियत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता है. निर्यात और बाजार में अच्छी मांग होने के कारण किसान इसे लगाकर बेहतर आमदनी कमा सकते हैं. हालांकि, बासमती किस्मों में रोग प्रबंधन और क्वालिटी बनाए रखने के लिए विशेष ध्यान देना जरूरी होता है. वहीं, ये किस्म पकने में लगभग 115 से 125 दिन का समय लेती है. इस किस्म से किसान 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ उपज ले सकते हैं.

3. पीआर 136 धान किस्म: पीआर 136 को पछेती रोपाई के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है. यह किस्म कम समय में पकने वाली किस्मों में शामिल है और पानी की बचत में भी मदद करती है. इसके दाने लंबे और अच्छी क्वालिटी वाले होते हैं. कम अवधि में तैयार होने के कारण किसान इसके बाद खेत में समय पर अगली फसल की तैयारी कर सकते हैं. पीआर 136 किस्म 125 से 130 दिनों में पककर पूरी तरह से तैयार हो जाती है. वहीं, पीआर 136 धान की सामान्य औसत पैदावार 26 से 28 क्विंटल प्रति एकड़ होती है.

4. पूसा बासमती 1692 धान किस्म: पूसा बासमती 1692 भी पंजाब और हरियाणा में तेजी से अपनाई जा रही पछेती धान किस्मों में शामिल है. यह कम अवधि में तैयार होने वाली किस्म है जो रोपाई के बाद लगभग 110 से 115 दिनों में पककर पूरी तरह तैयार हो जाती है, और इसमें अन्य किस्मों की तुलना में पानी की खपत भी कम होती है. इसके दाने लंबे और खुशबूदार होते हैं, जिससे बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिल सकती है. यह किस्म उन किसानों के लिए उपयोगी है, जो कम समय में फसल तैयार कर अगली खेती की तैयारी करना चाहते हैं. इसकी पैदावार औसतन 20 से 24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है.  

5. पीआर 128 धान किस्म: पंजाब में पीआर 128 धान किस्म को भी किसान देरी से रोपाई कर सकते हैं. यह किस्म अच्छी उपज देने के साथ-साथ रोगों के प्रति सहनशीलत है. इसके दानों की क्वालिटी अच्छी होती है और यह उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जहां किसान समय पर धान की रोपाई नहीं कर पाते हैं. उचित खाद, सिंचाई और प्रबंधन से इस किस्म से बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है. ये धान रोपाई के बाद पककर लगभग 111 दिनों में तैयार हो जाती है. पीआर 128 धान की पैदावार औसतन 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है.

पछेती धान में इन बातों का रखें ध्यान

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पछेती धान की खेती में सही समय पर रोपाई, संतुलित खाद प्रबंधन और रोग नियंत्रण बेहद जरूरी होता है. किसान बीज उपचार के बाद ही पौध तैयार करें और खेत में जरूरत के अनुसार सिंचाई करें. साथ ही, पानी की बचत के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद हो सकता है. ऐसे में पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए पछेती धान की ये उन्नत किस्में बदलते मौसम और खेती की चुनौतियों के बीच बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. सही किस्म का चुनाव और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर किसान कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

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