प्याज के उत्पादन में हो सकती है गिरावट लगातार कम दाम की मार झेल रहे किसानों ने प्याज की खेती में कटौती कर दी है केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सोमवार देर शाम बागवानी फसलों के उत्पादन का जो अनुमान जारी किया है उससे यह बात सामने निकल कर आई है. एक तरफ पिछले साल प्याज उत्पादन में बंपर उछाल आया था वही इस साल किसानों ने खेती कम कर दी है जिसे उत्पादन में कमी का अनुमान लगाया गया है. साल 2022-23 के प्रथम अग्रिम अनुमान की रिपोर्ट के मुताबिक में 2021-22 के मुकाबले इस साल प्याज का उत्पादन 6.8 लाख मीट्रिक लाख टन घट जाएगा. लेकिन, क्या इसकी वजह से किसानों को सही दाम मिल पाएगा.
प्याज उत्पादक किसान पिछले दो साल से कम दाम की मार झेल रहे हैं. उनकी उत्पादन लागत प्रति किलो 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जबकि मार्केट में प्याज का दाम सिर्फ दो से 8 रुपये प्रति किलो तक रह गया है. कई ऐसी मंडियां हैं, जिसमें लगातार प्याज का दाम सिर्फ 1 किलो चल रहा है. किसानों का आरोप है कि इसके बावजूद सरकार ने किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले का कहना है कि अगर प्याज का दाम इसी तरह लागत से कम मिलता रहा, किसानों को घाटा होता रहा तो अगले साल उत्पादन और कम हो जाएगा. धीरे-धीरे ऐसी नौबत आ जाएगी कि सरकार को खाद्य तेलों और दालों की तरह प्याज का भी आयात करना पड़ेगा. ऐसी स्थिति आए उससे पहले ही सरकार प्याज की लागत के आधार पर उनका न्यूनतम समर्थन मूल्य फिक्स करें ताकि किसानों को घटा न उठाना पड़े. उत्पादन में कमी के अनुमान के बाद प्याज का दाम बढ़ना चाहिए.
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पिछले दो साल से किसानों को इतना कम भाव मिल रहा है कि उन्होंने अब प्याज की खेती का रकबा कम करना शुरू कर दिया है. प्याज के सबसे बड़े उत्पादक महाराष्ट्र में किसान काफी वक्त से इस बात की धमकी दे रहे हैं कि उन्हें दाम नहीं मिला तो अब वह खेती धीरे-धीरे कम करेंगे. दूसरी वैकल्पिक फसलों की तलाश करेंगे.
दिघोले का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने प्याज किसानों के घाटे की भरपाई करने के नाम पर 350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को मदद करने की योजना चलाई. लेकिन योजना सिर्फ फरवरी और मार्च 2023 के लिए थी. इसमें कोई किसान अधिकतम 200 क्विंटल तक का ही लाभ ले सकता था. जबकि किसानों को मार्च के बाद भी लगातार कम दाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. योजना की शर्तें ऐसी थीं कि किसानों को कोई खास लाभ नहीं मिला.
कुछ अर्थशास्त्री और सत्ता में बैठे लोग प्याज के कम दाम के पीछे ज्यादा उत्पादन का दोष देते हैं. यानी एक तरह से किसानों को इसका जिम्मेदार बताते हैं. उत्पादन की बात करें तो देश में 2020-21 में 266.4 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ था. लेकिन 2021-22 में उत्पादन में रिकॉर्ड 50.5 लाख मीट्रिक टन का उछाल हुआ और यह 316.9 लाख टन तक पहुंच गया.
ऐसे में पहले से ही गिरा हुआ प्याज का दाम और कम हो गया. अब राहत की बात यह है कि 2022-23 में उत्पादन कम होकर सिर्फ 310.1 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है. देखना यह है कि अब इस अनुमान के बाद किसानों को प्याज का दाम अच्छा मिलेगा या नहीं.
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