बंपर उपज, खरीदार गायब: प्याज किसानों पर फिर पड़ेगी मार, लागत निकलना भी मुश्किल

बंपर उपज, खरीदार गायब: प्याज किसानों पर फिर पड़ेगी मार, लागत निकलना भी मुश्किल

देश में रिकॉर्ड प्याज उत्पादन के अनुमान के बीच बाजार में कीमतें गिर गई हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान हो रहा है. निर्यात नीति की कमजोरियों और भारी स्टॉक के चलते हालात और बिगड़ने की आशंका है, जिससे किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ सकता है.

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बंपर उपज, खरीदार गायब: प्याज किसानों पर फिर पड़ेगी मार, लागत निकलना भी मुश्किलउत्पादन बढ़ने से प्याज किसानों पर संकट

बागवानी फसलों का पूर्वानुमान जारी हो गया है. इस अनुमान ने प्याज किसानों की चिंता बढ़ा दी है. इस बार 27 परसेंट अधिक प्याज उत्पादन का पूर्वानुमान है. यह रिकॉर्ड ऐसे समय में बन रहा है जब मंडियों में कौड़ियों के भाव प्याज बिक रहा है. दूसरी ओर, एक्सपोर्ट पॉलिसी की खामियों ने प्याज के विदेशी खरीदारों को भगा दिया है. इसका बड़ा असर ये होगा कि न किसान कमाएंगे, न व्यापारी. फिर पिछले साल की तरह प्याज कहीं सड़कों पर फेंका जाएगा तो कहीं गाय-भैंसों को खिलाने के काम आएगा. 

अभी खरीफ प्याज का बंपर स्टॉक मंडियों और किसानों के घरों में पड़ा है. रबी की नई आवक को जगह देने के लिए पुराने स्टॉक को खत्म करना होगा. प्याज को औने पौने दाम में बेचकर खलिहान खाली करना होगा. व्यापारी उस प्याज को खरीदे भी तो बहुत फायदा नहीं होगा क्योंकि खाड़ी जैसे देशों में एक्सपोर्ट बंद है. ये हालात बताते हैं कि प्याज किसान को कोई लाभ होगा, न व्यापारी को.

आने वाले दिनों में और गिरेंगे भाव

इस बारे में जय किसान फार्मर्स फोरम, महाराष्ट्र के विभागीय अध्यक्ष निवृत्ती न्याहारकर ने कहा, जब तक ईरान और अमेरिका की लड़ाई चलेगी, तब तक प्याज किसानों की सांस अटकी रहेगी. महाराष्ट्र की बात करें तो रबी प्याज की खेती पूरे प्रदेश में होती है जबकि खरीफ प्याज नासिक में अधिक बोया जाता है. आने वाले दिनों में बाजार में पूरे महाराष्ट्र का प्याज आएगा. एक साथ आवक बढ़ने से प्याज की कीमतें एकदम से गिरेंगी. अभी तक किसानों को कुछ फायदा भी हो रहा था, तो आने वाले दिनों में वह ठप हो जाएगा.

न्याहारकर ने बताया, प्याज का उत्पादन खर्च 20 रुपये आता है जबकि भाव 5 से 10 रुपये मिल रहा है. किसानों को लागत का आधा भी नहीं मिल रहा है. जब किसान को कमाने का मौका होता है तो सरकार एक्सपोर्ट पर बैन लगा देती है. बैन का नतीजा है कि भारत के पुराने साझीदार देश छिटक गए. थोड़ा माल दुबई के रास्ते खाड़ी देशों को जा रहा था, वहां भी शिपमेंट बंद हो गई. भारत से अभी तक प्रीमियम क्वालिटी का प्याज दुबई के रास्ते कई देशों को जाता था, लेकिन खाड़ी युद्ध ने सब कुछ ठप कर दिया. आने वाले दिनों में जल्द कोई सुधार होता नहीं दिखता.

किसान हितैषी नीति बनाए सरकार

किसानों और प्याज की इस समस्या का उपाय क्या है? इसके जवाब में महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले कहते हैं, सरकार प्याज के बढ़ते उत्पादन को एक बड़ा अवसर माने. जब देश में प्याज की उपज कम होती है तो सरकार तुरंत निर्यात रोक देती है. यहां तक कि लोकल मार्केट में सप्लाई बनाए रखने के लिए प्याज का आयात भी करती है. इससे किसानों को नुकसान जरूर होता है, लेकिन सरकार फायदे में रहती है. इस बार सरकार के लिए सुनहरा मौका है क्योंकि 27 प्रतिशत अधिक प्याज निकलेगा. ऐसे में सरकार को निर्यात पर बैन लगाने की जरूरत नहीं होगी, न ही आयात करना पड़ेगा. जब सरकार के लिए सब कुछ पॉजिटिव है तो निर्यात की पॉलिसी कुछ ऐसी बनाई जाए जिससे किसानों का भला हो.

दिघोले ने कहा, बंपर उपज की वजह से सरकार को बफर स्टॉक की भी टेंशन नहीं. प्याज का बफर भरा रहेगा तो देश में किसी तरह की किल्लत नहीं होगी. इस अच्छे माहौल को देखते हुए सरकार को किसान हितैषी नीतियां बनानी चाहिए जिससे प्याज के सही भाव मिल सकें.

उत्पादन बढ़ने के 3 बड़े फायदे

हालांकि अधिक उत्पादन होने से प्याज किसानों को शर्तिया तौर पर नुकसान होगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता. कुछ ऐसी ही राय दी प्याज उत्पादक संघ के उपाध्यक्ष विकास सिंह ने. विकास सिंह ने 3 पॉइंट्स गिनाए और बताया कि बंपर उपज के बावजूद किसानों के लिए अच्छी उम्मीद अभी बरकरार है. वे कहते हैं, इस बार अल नीनो के संकेत हैं. इससे गर्मी बढ़ेगी जिसका फायदा दक्षिण भारत के प्याज किसानों को होगा. उनकी उपज कुछ देर से निकलेगी, इसलिए मौजूदा हालात से किसान बच जाएंगे. दूसरा मामला बांग्लादेश से जुड़ा है. वहां सरकार बदली है और इस बार प्याज का उत्पादन कम होने की आशंका है. इन दोनों फैक्टर का फायदा भारत को मिल सकता है. हमारे प्याज के लिए वहां का बाजार खुल सकता है.

तीसरा पॉइंट पाकिस्तान से जुड़ा है. भारत के प्याज को अभी पाकिस्तान से कड़ी टक्कर मिलती है, लेकिन ईरान युद्ध ने इसे कुछ हल्का कर दिया है. पाकिस्तान सड़क के रास्ते ईरान जैसे देशों से प्याज मंगाता है और उसे दूसरे बाजारों में महंगे रेट पर बेचता है. इसी तरह, पाकिस्तान के बलूचिस्तान और सिंध इलाके में प्याज का उत्पादन बहुत अधिक होता है जहां से सप्लाई कई देशों में भेजी जाती है. अभी पाकिस्तान के रिश्ते ईरान और बलूचिस्तान दोनों से बेहद खराब हैं जिसका असर प्याज पर देखा जा रहा है. इसलिए भारत के लिए उन देशों में निर्यात के मौके बन रहे हैं जहां अभी तक पाकिस्तान कब्जा जमाए बैठा था.

एक्सपर्ट्स की इन तमाम बातों से साफ है कि प्याज के दिन बहुत जल्द सुधरने वाले नहीं हैं. हालांकि किसानों को उम्मीद जरूर रखनी चाहिए कि लड़ाई बंद हो जाए तो दुबई जैसे मार्केट खुलेंगे, शांति लौटेगी और एक्सपोर्ट के जहाज समंदर पर फिर फर्राटे भरेंगे.

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