अलवर के किसानों की फसल पर पाले का कहर, सरसों और सब्जियों को नुकसान का खतरा

अलवर के किसानों की फसल पर पाले का कहर, सरसों और सब्जियों को नुकसान का खतरा

अलवर में पड़ रही कड़ाके की सर्दी ने सरसों और सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचाया है. किसान पहले ही प्याज की फसल से परेशान हैं और अब मौसम की मार ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कृषि विभाग ने फसल बचाने के उपाय सुझाए हैं, लेकिन किसानों की चिंता अभी भी बनी हुई है.

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अलवर के किसानों की फसल पर पाले का कहर, सरसों और सब्जियों को नुकसान का खतरासरसों और सब्जियों पर पाले की मार

राजस्थान के अलवर जिले में इस समय कड़ाके की सर्दी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. लगातार गिरते तापमान और खेतों में पड़ रहे पाले के कारण सरसों के साथ-साथ सब्जियों की फसल को नुकसान होने लगा है. किसान पहले ही प्याज की फसल खराब होने से आर्थिक परेशानी झेल चुके हैं और अब सरसों व सब्जियों से उन्हें बड़ी उम्मीद थी. लेकिन मौसम की मार ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है.

अलवर खेती और सब्जी उत्पादन का बड़ा केंद्र

अलवर जिला कृषि के क्षेत्र में एक अहम पहचान रखता है. यह न केवल राजस्थान बल्कि देश के बड़े सरसों उत्पादक जिलों में शामिल है. यहां सरसों की सबसे बड़ी मंडी है और यहीं से पूरे देश में सरसों का तेल सप्लाई किया जाता है. इसके अलावा अलवर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में सब्जियों की खेती होती है. रोज दर्जनों ट्रक टमाटर, बैंगन और अन्य सब्जियां दिल्ली और एनसीआर की मंडियों में भेजी जाती हैं. ऐसे में फसलों को हुआ नुकसान केवल किसानों ही नहीं, बल्कि आम लोगों की रसोई पर भी असर डाल सकता है.

तापमान गिरने से बढ़ा पाले का खतरा

इन दिनों अलवर का तापमान 2.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि रबी की फसलों के लिए छह डिग्री सेल्सियस से नीचे का तापमान नुकसानदायक माना जाता है. जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई की गई है. इस समय सरसों की फसल में फूल आ रहे हैं और कई जगह फलियां भी बन चुकी हैं. पाला पड़ने से फलियों के अंदर दानों में पानी भरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उपज पर बुरा असर पड़ता है. किसानों का कहना है कि यदि सर्दी ऐसे ही बनी रही तो सरसों की फसल में 50 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है.

सब्जियों पर भी पाले का सीधा असर

सरसों के साथ-साथ सब्जियों की फसल भी इस सर्दी से बुरी तरह प्रभावित हो रही है. खासकर टमाटर और बैंगन जैसी फसलें पाले के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं. अगर इन पर बर्फ जम गई तो पौधे पूरी तरह खराब हो सकते हैं. कुछ किसान टमाटर की फसल को कपड़े से ढककर पाले से बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह तरीका केवल उन्हीं किसानों के लिए संभव है जिनके पास संसाधन हैं. छोटे और सीमांत किसानों के लिए इस तरह फसल को बचा पाना बहुत कठिन हो जाता है.

पहले प्याज, अब सरसों ने बढ़ाई चिंता

किसानों का दर्द इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इस साल पहले ही प्याज की फसल खराब हो चुकी है. प्याज के दामों को लेकर किसान पहले ही भारी नुकसान झेल चुके हैं. ऐसे में उन्हें सरसों और सब्जियों से आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद थी. लेकिन अब सर्दी ने एक बार फिर किसानों को नुकसान की ओर धकेल दिया है. किसानों का कहना है कि अगर सरसों की फसल खराब होती है तो सरकार को उन्हें मुआवजा देना चाहिए, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें.

किसानों की आजीविका पर सीधा असर

अलवर के किसानों की आजीविका मुख्य रूप से सरसों, गेहूं और सब्जियों पर निर्भर है. यहां की सब्जियां शुद्ध पानी से तैयार की जाती हैं और देश के कई राज्यों तक सप्लाई होती हैं. अगर सब्जियों और सरसों की पैदावार घटती है तो किसानों की आमदनी कम होगी और बाजार में सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं. इसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर भी पड़ेगा.

कृषि विभाग की चेतावनी और सलाह

इस पूरे मामले पर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक पीसी मीणा ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकती है. फिलहाल सरसों में ज्यादा नुकसान सामने नहीं आया है, लेकिन यदि यही मौसम बना रहा तो नुकसान बढ़ सकता है. उन्होंने किसानों को पाले से बचाव के लिए कुछ उपाय अपनाने की सलाह दी है. विभाग का कहना है कि सही समय पर सिंचाई और तापमान बढ़ाने के उपाय करने से नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है.

मौसम पर टिकी किसानों की नजर

फिलहाल अलवर के किसान मौसम के सुधरने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. उनकी नजर आने वाले दिनों के तापमान पर टिकी है. अगर सर्दी कम होती है तो फसल को बचाया जा सकता है, लेकिन अगर गलन भरी ठंड जारी रही तो किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है. ऐसे में यह समय किसानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.

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