उपकार के द्वारा फसल प्रबंधन की रणनीति तैयार की गई.मौसम विभाग का अनुमान है कि उत्तर प्रदेश में बहुत जल्द मॉनसून की एंट्री भी हो सकती है. इसी क्रम में उप्र कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के उप महानिदेशक डॉ. राजर्षि कुमार गौड़ ने क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की बैठक में प्रदेश के वर्तमान मौसम परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए किसानों को आगामी दो सप्ताह के कृषि प्रबंधन के लिए विस्तृत और अत्यंत उपयोगी सुझाव और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. बैठक में मौसम पूर्वानुमान और खरीफ फसलों के मौजूदा आच्छादन की गहन समीक्षा कर फसल प्रबंधन की रणनीति तैयार की गई.
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी 3-4 दिनों के भीतर दक्षिण पश्चिम मॉनसून के उत्तर प्रदेश में आगे बढ़ने और सक्रिय होने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं. प्रथम सप्ताह (26 जून से 02 जुलाई, 2026) के आरम्भिक चरण में 28 जून तक प्रदेश में छिटपुट वर्षा होगी, जिसके बाद 29 जून से वर्षा में बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई है, फिर भी औसत साप्ताहिक वर्षा सामान्य से बहुत कम रह सकती है. वहीं द्वितीय सप्ताह (3 से 9 जुलाई, 2026) में प्रदेश भर में वर्षा होने के बावजूद औसत साप्ताहिक वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है.
तापमान की दृष्टि से पूर्वी मैदानी एवं विन्ध्य क्षेत्र के पूर्वी भाग में अधिकतम तापमान सामान्य से 1 से 02 डिग्री सेल्सियस अधिक और अन्य कृषि जलवायु अंचलों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान सभी अंचलों में सामान्य से 1 से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 28 जून तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में उष्ण लहर (लू) चल सकती है और 29 जून से मेघगर्जन या वज्रपात के साथ 40-50 किमी. प्रति घंटा की तेज हवाओं के साथ वर्षा हो सकती है, जबकि दूसरे सप्ताह में दक्षिणी भाग में लू की मामूली संभावना बनी रहेगी.
बैठक में कृषि विभाग से 23 जून 2026 तक प्राप्त आच्छादन आंकड़ों की समीक्षा की गई, जिसके अनुसार कुल खरीफ फसलों के निर्धारित लक्ष्य 110.00 लाख हेक्टेयर के सापेक्ष अब तक केवल 6.63 लाख हेक्टेयर (5.99 प्रतिशत) बुवाई पूरी हो सकी है. इस वर्ष मॉनसून में सामान्य से कम वर्षा के अनुमान को देखते हुए वैज्ञानिकों ने किसानों को विशेष फसल प्रबंधन की सलाह दी है. वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों को धान के स्थान पर 'श्री अन्न' जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कोदों के साथ-साथ उर्द, मूंग और तिल जैसी फसलों को प्राथमिकता देने को कहा गया है, क्योंकि ये फसलें मौसम के कुप्रभाव से बचाने में सक्षम हैं.
इसके अतिरिक्त अरहर, तिल, मक्का एवं श्री अन्न की बुवाई कुंड एवं नाली विधि से करने तथा अरहर की बुवाई रिज बनाकर मेड़ों पर करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वर्षा जल का सदुपयोग हो सके. वहीं, धान की नर्सरी में पानी का ठहराव न होने देने, आवश्यकतानुसार सायंकाल में सिंचाई करने और रोपाई वाले खेतों में 1 फीट ऊंची मेड़ बनाने की सलाह दी गई है ताकि जल-संग्रहण कर उसका उपयोग जीवन रक्षक सिंचाई में किया जा सके.
उपकार के उप महानिदेशक डॉ. राजर्षि कुमार गौड़ ने बताया कि किसानों को अपने खाली खेतों की मिट्टी पलट हल से गहरी जुताई करने का सुझाव दिया गया है ताकि खरपतवार के बीज और कीट गर्मी से नष्ट हो जाएं. जिन किसानों ने हरी खाद के लिए सनई व ढैंचे की बुवाई की है, उन्हें 40 से 42 दिन की पौध होने पर उसकी पलटाई करने को कहा गया है. फसलों को प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने के लिए शोधित बीजों का प्रयोग करने, फास्फेटिक उर्वरक व जैविक खादों का इस्तेमाल करने तथा बागवानी में आम की फसल को फलमक्खी से बचाने हेतु प्रति हेक्टेयर 8-10 क्यूल्योर ट्रैप लगाने व नीम एक्सट्रैक्ट का छिड़काव करने की सलाह दी गई है.
इसी तरह मत्स्य पालकों को तालाबों में पानी का स्तर 1.50 मीटर बनाए रखने तथा पशुपालकों को राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पशु चिकित्सालयों के माध्यम से एचएस का निःशुल्क टीकाकरण कराने की अपील की गई है. पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत वन एवं वन्य जीव विभाग की पौधशालाओं से वित्तीय वर्ष 2026-27 में यूकेलिप्टस एवं पॉपलर को छोड़कर अन्य 35 करोड़ पौधों का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है.
डॉ. राजर्षि कुमार गौड़ के मुताबिक, किसानों को मौसम की त्वरित डिजिटल चेतावनियों का पालन करने और रियल टाइम जानकारी व आपदाओं से सुरक्षा के लिए 'सचेत ऐप' डाउनलोड करने तथा अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की गई है.
ये भी पढ़ें-
ये भी पढ़ें- कई राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट, जानिए आपके यहां कैसा रहेगा मौसम
ये भी पढ़ें- यूपी के किसानों को बड़ी राहत, 8 जुलाई तक बढ़ी गेहूं-चना-मसूर की MSP पर खरीद
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today