अल नीनो अलर्ट: आंध्र प्रदेश के कई जिले हाई-रिस्क जोन में, किसानों को फसल बदलने की सलाह

अल नीनो अलर्ट: आंध्र प्रदेश के कई जिले हाई-रिस्क जोन में, किसानों को फसल बदलने की सलाह

केंद्र सरकार ने अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए आंध्र प्रदेश के कई जिलों को हाई-रिस्क जोन में रखा है कमजोर मॉनसून और पानी की कमी के खतरे को देखते हुए किसानों को सूखा-रोधी फसलें अपनाने और वैज्ञानिक खेती के तरीके अपनाने की सलाह दी गई है.

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अल नीनो अलर्ट: आंध्र प्रदेश के कई जिले हाई-रिस्क जोन में, किसानों को फसल बदलने की सलाहअल नीनो: आंध्र प्रदेश के कई जिले हाई रिस्क जोन में

केंद्र सरकार ने अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए देश के कई कृषि क्षेत्रों के लिए अलर्ट जारी किया है. इस अलर्ट में आंध्र प्रदेश के कई जिलों को “हाई-रिस्क जोन” के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां खरीफ सीजन में कम बारिश, गिरते भूजल स्तर और सिंचाई की सीमित सुविधा जैसी चुनौतियां किसानों के सामने आ सकती हैं.

सरकारी आकलन के मुताबिक, रायलसीमा क्षेत्र के अनंतपुर, कुरनूल, कडप्पा और चित्तूर जिलों को सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा गया है. इसके अलावा राज्य के उत्तरी तटीय जिलों श्रीकाकुलम और विजयनगरम को भी हाई-रिस्क कैटेगरी में शामिल किया गया है. प्रकाशम और नेल्लोर जिले भी संवेदनशील क्षेत्र माने गए हैं, जहां समय रहते तैयारी करने की जरूरत है. 

देश में 315 जिले चिन्हित

केंद्र द्वारा तैयार की गई आपातकालीन योजना में देश के कुल 315 जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां कमजोर मॉनसून और अल नीनो का असर खेती पर पड़ सकता है. इनमें से 111 जिलों को सिंचाई की कमी के चलते उच्च प्राथमिकता (हाई प्रायोरिटी) में रखा गया है, जबकि 76 जिले मध्यम प्राथमिकता की श्रेणी में आते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में खेती मुख्य रूप से मॉनसून की बारिश पर निर्भर है. ऐसे में यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो बुवाई से लेकर फसल उत्पादन तक पर असर पड़ सकता है. खासकर रायलसीमा जैसे इलाकों में, जहां पहले से ही पानी की कमी है, वहां ज्यादा पानी वाली फसलों के लिए जोखिम और बढ़ सकता है.

फसल बदलने की सलाह

सरकार और कृषि विभाग की ओर से किसानों को सलाह दी गई है कि वे हालात के अनुसार अपनी फसल रणनीति बदलें. अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय दालें, ज्वार, बाजरा और रागी जैसी सूखा-रोधी फसलों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. इसके साथ ही वैज्ञानिक खेती के तरीकों जैसे मल्चिंग, इंटरक्रॉपिंग और डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पानी की खपत कम हो और उत्पादन बना रहे.

जिला प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सूखे जैसे हालात का इंतजार करने के बजाय पहले से ही तैयारियां शुरू करें. फसल विविधीकरण, पानी प्रबंधन और किसानों को समय पर सलाह देने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

स्थिति पर नजर रखने के लिए राज्य सरकार ने ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ और ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ को सक्रिय किया है. इन सिस्टम्स के जरिए मौसम, फसल और जोखिम से जुड़ी जानकारी पर नजर रखकर किसानों को रियल-टाइम सलाह दी जाएगी.

सरकार का मानना है कि समय रहते सही कदम उठाए जाने पर अल नीनो के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है और किसानों की आय को सुरक्षित रखा जा सकता है.

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