धान की कटाई से पहले बारिश बनी आफत, करनाल में खेतों में बिछी तैयार फसल

धान की कटाई से पहले बारिश बनी आफत, करनाल में खेतों में बिछी तैयार फसल

करनाल के निसिंग क्षेत्र में बारिश से पककर तैयार 1509 धान की फसल खेतों में बिछ गई. खेतों में पानी भरने से किसानों को कटाई में परेशानी हो रही है. किसानों ने करीब 30 प्रतिशत फसल नुकसान का दावा किया है. किसानों ने सरकार और प्रशासन से फसल की गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है.

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धान की कटाई से पहले बारिश बनी आफत, करनाल में खेतों में बिछी तैयार फसलकरनाल में धान की फसल पककर तैयार, बारिश ने की बर्बाद

हरियाणा के करनाल जिले में हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. निसिंग क्षेत्र में बारिश के कारण पककर तैयार खड़ी धान की फसल खेतों में बिछ गई है. खेतों में पानी भरने से किसानों को फसल की कटाई और बिक्री को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि जिस समय धान की फसल को बारिश की जरूरत थी, उस समय पर्याप्त बारिश नहीं हुई, लेकिन अब फसल पककर तैयार होने के बाद बेमौसम बारिश ने नुकसान पहुंचा दिया है.

बारिश से खेतों में बिछ गई 1509 धान की फसल

निसिंग क्षेत्र के किसानों के मुताबिक, पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है. बारिश के कारण खेतों में खड़ी 1509 धान की पककर तैयार फसल जमीन पर गिर गई है. किसानों का कहना है कि फसल पूरी तरह तैयार थी और अब बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है. कई खेतों में धान की फसल बुरी तरह बिछ गई है, जिससे कटाई में भी परेशानी आने की आशंका है. एक किसान ने बताया कि आसपास के कई खेतों में 1509 धान की फसल पककर तैयार हो चुकी थी. बारिश के बाद करीब 30 प्रतिशत तक फसल के नुकसान का अनुमान है. किसान का कहना है कि अभी भी मौसम खराब बना हुआ है और अगर आगे भी बारिश होती है तो नुकसान और बढ़ सकता है. ऐसे में किसान भगवान भरोसे बैठे हैं.

फसल खराब होने से किसानों की बढ़ी चिंता

किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार करने में उन्होंने काफी मेहनत और पैसा लगाया है. बीज, खाद, दवाई, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद अब जब फसल कटाई के लिए तैयार हुई तो बारिश ने नुकसान कर दिया. किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि खेत में पानी जमा होने के कारण धान की कटाई करना मुश्किल हो रहा है. किसानों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में भी कई बार मौसम की मार से उनकी फसलों को नुकसान हुआ है. इस बार उन्हें उम्मीद थी कि धान की फसल अच्छी होगी और उन्हें कुछ राहत मिलेगी, लेकिन अचानक हुई बारिश ने उनकी चिंता फिर बढ़ा दी है.

खेतों में पानी भरने से कटाई में परेशानी

किसान जगपाल सिंह ने बताया कि जब धान की फसल को बारिश की जरूरत थी, तब बारिश नहीं हुई. अब जब फसल पककर तैयार हो गई है, तब बारिश हो रही है. इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि खेतों में पानी भर गया है और कई जगह धान की फसल पानी में गिर गई है. जगपाल सिंह के मुताबिक, खेतों में पानी खड़ा होने के कारण मशीन से धान की कटाई करना भी मुश्किल हो सकता है. खेतों में पानी की निकासी की सही व्यवस्था नहीं होने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है. अगर खेतों से पानी जल्दी नहीं निकला तो फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है.

मंडी में रखी फसल पर भी बारिश का खतरा

किसानों ने बताया कि सिर्फ खेतों में खड़ी फसल ही बारिश से प्रभावित नहीं हुई है, बल्कि मंडियों में पहुंच चुकी धान की फसल को लेकर भी चिंता बनी हुई है. किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन बारिश के कारण वहां भी फसल को सुरक्षित रखना चुनौती बन रहा है. किसानों का कहना है कि धान की फसल अच्छी तरह तैयार होकर बिकेगी तभी उन्हें अपनी मेहनत का पैसा मिलेगा. खेती ही उनकी आमदनी का मुख्य साधन है. ऐसे में फसल खराब होने का सीधा असर उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों और अगले सीजन की खेती पर पड़ता है.

किसानों ने सरकार से गिरदावरी और मुआवजे की मांग की

बारिश से हुए नुकसान के बाद अब किसानों की नजर सरकार और प्रशासन पर है. किसानों ने मांग की है कि प्रभावित गांवों और खेतों में फसल नुकसान की गिरदावरी करवाई जाए. किसानों का कहना है कि अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर खेतों का जायजा लेना चाहिए और बारिश से हुए नुकसान का सही आकलन करना चाहिए. किसानों ने सरकार से खराब हुई धान की फसल के लिए उचित मुआवजा देने की मांग की है. उनका कहना है कि मौसम के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए, ताकि वे आर्थिक संकट में न फंसें.

किसानों के सामने बड़ी आर्थिक चिंता

किसानों का कहना है कि उनका पूरा परिवार खेती पर निर्भर है. अगर फसल अच्छी होती है और सही दाम पर बिकती है, तभी घर का खर्च चलता है. फसल खराब होने पर किसान के सामने सिर्फ मौजूदा नुकसान ही नहीं, बल्कि अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य खर्च जुटाने की भी समस्या खड़ी हो जाती है. करनाल के निसिंग क्षेत्र में बारिश के बाद धान के खेतों की स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. अब किसान चाहते हैं कि बारिश से हुए नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए, खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए और प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा दिया जाए.

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