खेत से विदेश तक पहुंचेगी पीलीभीत की बासमती, शुरू हुआ नया ट्रेनिंग सेंटर

खेत से विदेश तक पहुंचेगी पीलीभीत की बासमती, शुरू हुआ नया ट्रेनिंग सेंटर

पीलीभीत के किसानों के लिए बासमती खेती को लेकर बड़ी पहल शुरू हुई है. टांडा बिजैसी में नया प्रशिक्षण केंद्र बनाया जा रहा है, जहां किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक खेती की तकनीक और निर्यात की जानकारी मिलेगी. इससे पीलीभीत की बासमती को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने और किसानों को बेहतर दाम दिलाने में मदद मिलेगी.

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खेत से विदेश तक पहुंचेगी पीलीभीत की बासमती, शुरू हुआ नया ट्रेनिंग सेंटरपीलीभीत में शुरू हुआ नया प्रशिक्षण केंद्र

उत्तर प्रदेश के तराई इलाके पीलीभीत के किसानों के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, अब यहां की बासमती चावल को देश ही नहीं, बल्कि विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है. पीलीभीत के टांडा बिजैसी में बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन यानी BEDF और एपीडा के 'वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र और प्रदर्शन फार्म का शिलान्यास किया गया है.  केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इसकी आधारशिला रखी. इस केंद्र के जरिए किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक खेती की तकनीक और निर्यात के लिए जरूरी जानकारी दी जाएगी.

देश का दूसरा बासमती ट्रेनिंग सेंटर

पीलीभीत की जमीन धान की खेती के लिए काफी अच्छी मानी जाती है. अब यहां के किसानों को बासमती की खेती में नई तकनीक से जोड़ने की तैयारी है. टांडा बिजैसी में बनने वाला यह प्रशिक्षण केंद्र किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है. यहां किसानों को अच्छी किस्म के बीज, फसल में कीट और रोगों से बचाव और आधुनिक खेती के तरीके बताए जाएंगे. प्रदर्शन फार्म में किसान नई तकनीकों को खुद देखकर और समझकर अपने खेत में अपना सकेंगे. इस पहल का एक बड़ा मकसद किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम दिलाना है. इसके लिए किसानों और उनके एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठनों को बड़े खरीदारों और निर्यातकों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा.

बता दें कि यह देश का दूसरा बासमती और पहला जैविक कृषि प्रशिक्षण केंद्र होगा. 8 एकड़ में बनने वाले इस केंद्र में किसानों को आधुनिक खेती और अच्छी क्वालिटी वाली बासमती पैदा करने की ट्रेनिंग दी जाएगी. इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि निर्यात और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

किसानों को मिलेगा प्रमाणित बीज

केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि किसानों की आय बढ़े, उन्हें आधुनिक तकनीक मिले और स्थानीय उत्पादों को दुनिया में पहचान मिले. इसी दिशा में पीलीभीत में यह महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जा रहा है. यहां किसानों को अच्छे और प्रमाणित बीज के साथ आधुनिक तकनीक की जानकारी मिलेगी. किसानों को सीधे निर्यात बाजार से जोड़ने का प्रयास होगा, जिससे उन्हें अपनी फसल का बेहतर दाम मिल सके.

किसानों और FPO को मिलेगा फायदा

इस केंद्र की खास बात यह है कि यहां सिर्फ किसानों को जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि खेत में नई तकनीक का प्रदर्शन भी किया जाएगा. बासमती की अलग-अलग किस्मों को यहां उगाकर उनका परीक्षण किया जाएगा. विदेशों में चावल खरीदते समय उसकी क्वालिटी और उसमें कीटनाशकों के अवशेष को लेकर काफी सख्त नियम हैं. ऐसे में किसानों को कम से कम रसायनों के इस्तेमाल और सुरक्षित खेती के तरीके बताए जाएंगे, ताकि उनकी बासमती अंतरराष्ट्रीय बाजार के मानकों पर खरी उतर सके. ऐसे में जिला प्रशासन की कोशिश है कि इस केंद्र का फायदा जिले के ज्यादा से ज्यादा किसानों और एफपीओ को मिले.

जैविक खेती सीखने का मिलेगा मौका

पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि यह केंद्र पीलीभीत के किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यहां किसानों को उन्नत बीज और जैविक खेती की आधुनिक तकनीक सीखने का मौका मिलेगा. प्रशासन की कोशिश रहेगी कि जिले के सभी एफपीओ और किसानों को इससे जोड़ा जाए, ताकि फसल की क्वालिटी बेहतर हो और किसानों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच मिल सके.

किसानों को दी जाएगी खेती की जानकारी

एपीडा के BEDF अधिकारी डॉ. तरुण ने कहा कि इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य पीलीभीत को बासमती निर्यात के एक बड़े क्षेत्र के रूप में विकसित करना है. किसानों को अच्छे प्रमाणित बीज और अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से खेती की जानकारी दी जाएगी. किसानों और स्थानीय उद्यमियों को निर्यातकों से जोड़ने पर भी काम होगा, ताकि पैकेजिंग, टेस्टिंग और निर्यात की प्रक्रिया आसान हो सके और किसानों को बासमती का बेहतर दाम मिले.

वहीं, इस केंद्र से सिर्फ खेती को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि गांव के युवाओं के लिए भी रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं.  एग्री-बिजनेस, चावल की प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और सप्लाई-चेन जैसे कामों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं. एफपीओ अपने ब्रांड तैयार करके पीलीभीत की बासमती को बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे. यानी आने वाले समय में पीलीभीत के किसानों की बासमती खेत से निकलकर देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच सकती है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है. 

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