मेवात में आलू की खेती की नई शुरुआत, किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद

मेवात में आलू की खेती की नई शुरुआत, किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद

मेवात में पहली बार बड़े स्तर पर आलू की खेती शुरू हुई है. बागवानी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की मदद से किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है. कम लागत में ज्यादा कमाई की यह नई पहल मेवात की खेती की तस्वीर बदल सकती है.

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मेवात में आलू की खेती की नई शुरुआत, किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीदआलू की खेती से बढ़ेगी कमाई

मेवात क्षेत्र में खेती के क्षेत्र में एक नई और अच्छी शुरुआत हुई है. यहां पहली बार बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जा रही है. जिला बागवानी अधिकारी डॉ. अब्दुल रजाक चौहान के अनुसार, इस नई खेती से किसानों की आमदनी बढ़ने की पूरी उम्मीद है. किसानों में इस नई फसल को लेकर खुशी और उत्साह देखा जा रहा है.

पहली बार उगी आलू की बड़ी फसल

डॉ. चौहान ने बताया कि उन्होंने घटवासन, सिरसवास, तिगांव और बूचाका गांवों का दौरा किया और आलू की फसल का निरीक्षण किया. इन गांवों में किसानों ने करीब 15 से 20 एकड़ जमीन पर आलू की खेती की है. फसल की हालत बहुत अच्छी है और पैदावार भी बेहतर दिखाई दे रही है. यह फिरोजपुर झिरका बेल्ट में आलू की पहली बड़ी खेती मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले इस इलाके में आलू नहीं उगाया जाता था.

किसानों को दी गई नई जानकारी

डॉ. चौहान ने बताया कि जब उन्होंने 4 अप्रैल 2025 को नूंह में कार्यभार संभाला, तब कुछ किसानों ने आलू की खेती के बारे में उनसे बात की. किसानों की रुचि देखकर उन्हें आलू की आधुनिक खेती, नई तकनीक, सही समय पर ट्रांसपोर्ट और पाले से बचाव के तरीकों की जानकारी दी गई. इस दौरान करीब 15 से ज्यादा किसान मौजूद थे, जिनसे सीधे बातचीत कर सरकारी योजनाओं के बारे में समझाया गया.

कम खर्च, ज्यादा कमाई

आलू की खेती में किसानों का खर्च लगभग 30 हजार रुपये प्रति एकड़ आता है. अगर बाजार में भाव अच्छे रहे, तो किसान डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति एकड़ तक कमा सकते हैं. आने वाले समय में चिप्स बनाने वाले आलू की खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इससे किसानों की कमाई ढाई लाख रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है.

सरकारी योजनाओं का लाभ

किसानों को भावांतर भरपाई योजना के बारे में भी बताया गया. अगर बाजार में आलू का भाव गिर जाता है, तो सरकार तय रेट के अनुसार किसानों को पैसा देती है. हाल ही में सरकार ने आलू और गोभी किसानों को इस योजना के तहत करोड़ों रुपये दिए हैं.

बीमा और सब्सिडी की सुविधा

डॉ. चौहान ने किसानों को मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना की जानकारी दी. इसमें सिर्फ 750 रुपये प्रति एकड़ में सब्जी फसलों का बीमा होता है. अगर प्राकृतिक आपदा से पूरी फसल खराब हो जाए, तो सरकार किसानों को तय पैसा सीधे खाते में देती है. इसके अलावा आलू और टमाटर की खेती पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान मिलता है. पाले से बचाव के लिए पॉलीटनेल लगाने पर भी सब्सिडी दी जाती है.

बिना जमीन वाले किसान भी ले सकते हैं लाभ

डॉ. चौहान ने बताया कि जिन किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है, वे पट्टानामा के आधार पर भी खेती कर सकते हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं. इसके लिए सिर्फ मालिक और किसान के हस्ताक्षर और गांव के सरपंच या नंबरदार की पुष्टि जरूरी है.

मेवात की खेती बदलेगी तस्वीर

अंत में उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना है. बागवानी विभाग किसानों की हर संभव मदद कर रहा है. मेवात में आलू की यह नई पहल आने वाले समय में खेती की तस्वीर बदलने का काम करेगी.  (कासिम खान का इनपुट)

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