आलू के किसान जल्द कर लें ये कामइस साल दिसंबर से अब तक कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है. सबसे ज्यादा असर आलू की फसल पर पड़ा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस समय आलू के पौधे सबसे नाजुक अवस्था में होते हैं. अगर किसान 25 जनवरी तक सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाए, तो फसल को ठंड से बचाया जा सकता है और उत्पादन भी बढ़ सकता है.
ठंड के मौसम में मिट्टी सख्त हो जाती है. सख्त मिट्टी में जड़ों तक नमी नहीं पहुंच पाती, जिससे आलू का विकास धीमा हो जाता है. ऐसे में किसान भारी सिंचाई से बचें और हल्की, जरूरत के अनुसार पानी दें. दिन के समय सिंचाई करना सबसे फायदेमंद होता है, ताकि रात में ठंड में पानी जमकर आलू के पौधों को नुकसान न करे. मिट्टी को नरम रखना आलू के कंद के विकास के लिए बहुत जरूरी है.
ठंड के समय खेत में पानी जमा होने से आलू की फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है. पानी जमा होने से कंद सड़ने लगते हैं और फसल पूरी खराब हो सकती है. इसके अलावा इस मौसम में झुलसा रोग, फफूंद और कीट तेजी से फैलते हैं. इसलिए किसान को हर 2-3 दिन में खेत का निरीक्षण करना चाहिए. रोग या कीट के शुरुआती लक्षण दिखते ही कृषि विशेषज्ञों की सलाह से दवा का छिड़काव करें. इससे नुकसान को समय रहते रोका जा सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार हल्की गुड़ाई करना बेहद असरदार उपाय है. गुड़ाई से मिट्टी भुरभुरी होती है, जड़ों तक हवा पहुंचती है और कंद तेजी से बढ़ते हैं. इससे आलू के पौधे मजबूत बनते हैं और जनवरी के अंत तक पड़ने वाली ठंड का असर कम होता है.
ठंड में आलू की फसल पर कीट और रोग जल्दी फैलते हैं. किसान को खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए. अगर कहीं झुलसा रोग या फफूंद दिखाई दें, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेकर सही दवा छिड़कें. समय पर उपाय करने से आलू की फसल सुरक्षित रहती है और पैदावार बढ़ती है.
अगर किसान 25 जनवरी तक इन आसान उपायों को अपनाते हैं:
तो पूरी दिसंबर से चली ठंड भी आलू की फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी. इसके अलावा फसल मज़बूत और गुणवत्तापूर्ण होगी. किसानों की मेहनत का पूरा फल उन्हें मिलेगा और पैदावार बढ़ेगी.
ठंड के मौसम में आलू की फसल की सुरक्षा थोड़ी मेहनत मांगती है, लेकिन सही देखभाल और आसान उपाय अपनाकर किसान अपने खेत को सुरक्षित रख सकते हैं. हल्की सिंचाई, मिट्टी की नरमी, समय पर निरीक्षण और हल्की गुड़ाई अपनाने से आलू के पौधे मजबूत रहते हैं और पैदावार बढ़ती है. इस तरह किसान अपनी मेहनत को सफल बना सकते हैं और ठंड से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं.
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