Cotton Mandi Bhav: कपास के दाम में जबरदस्त उछाल, 8 हजार के पार पहुंचा दाम

Cotton Mandi Bhav: कपास के दाम में जबरदस्त उछाल, 8 हजार के पार पहुंचा दाम

अकोला जिले में कपास के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. बाजार में कम आवक और अंतरराष्ट्रीय मांग के चलते कपास का भाव 8,500 रुपये प्रतिक्विंटल तक पहुंच गया है. जानें तेजी के कारण और किसानों के लिए क्या है सही बिक्री समय.

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Cotton Mandi Bhav: कपास के दाम में जबरदस्त उछाल, 8 हजार के पार पहुंचा दाम8 हजार पार पहुंचा कपास का दाम

इस साल अकोला जिले में कपास के दाम तेजी से बढ़े हैं. किसान और व्यापारी दोनों इस बढ़त पर ध्यान दे रहे हैं. अभी कपास का भाव 8,400 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. यह पिछले कई सालों में सबसे ऊंचा भाव माना जा रहा है. बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में कपास का दाम 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक भी जा सकता है. इसी वजह से कपास को फिर से “सफेद सोना” कहा जाने लगा है.

सीजन की शुरुआत में भाव थे कम

जब कपास का सीजन शुरू हुआ था, तब दाम ज्यादा नहीं थे. उस समय कपास 6,500 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रही थी. किसान सोच रहे थे कि शायद इस बार ज्यादा मुनाफा नहीं होगा. लेकिन अचानक बाजार में तेजी आई और दाम सीधे 8,500 रुपये के पास पहुंच गए. इस तेजी ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है.

सरकारी एमएसपी से भी ज्यादा दाम

सरकार ने साल 2025-26 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया है. मध्यम धागे वाली कपास का एमएसपी 7,790 रुपये और लंबे धागे वाली कपास का एमएसपी 8,100 रुपये प्रति क्विंटल है. लेकिन अकोला जिले में निजी व्यापारी इससे भी ज्यादा दाम दे रहे हैं. कई जगहों पर किसान अपनी कपास 8,400 से 8,500 रुपये में बेच रहे हैं. इसलिए किसान सरकारी एजेंसी सीसीआई की बजाय निजी व्यापारियों को कपास बेचना पसंद कर रहे हैं.

क्यों बढ़ रहे हैं कपास के दाम

कपास के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण हैं. इस साल कपास की बुवाई का रकबा कम रहा है. बाजार में कपास की आवक भी उम्मीद से कम है. इसके अलावा कपास के आयात पर फिर से इंपोर्ट ड्यूटी लगा दी गई है, जिससे बाहर से आने वाला कपास कम हो गया है. कपास के बीज यानी सरकी के दाम भी तेजी से बढ़े हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कपास का उत्पादन कम होने की आशंका है. इन सभी वजहों से कपास के भाव में तेजी बनी हुई है.

सरकी के दाम ने बढ़ाई चमक

पहले सरकी का दाम 3,000 से 3,200 रुपये के आसपास था. अब यह बढ़कर 4,000 रुपये से ऊपर चला गया है. सरकी के दाम बढ़ने से कपास की कीमत भी बढ़ जाती है. व्यापारी सरकी और रूई का स्टॉक करने लगे हैं, क्योंकि आगे चलकर कमी होने का डर है. इसी कारण कपास के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं.

व्यापारियों की क्या राय है

अकोला के कपास व्यापारी अनिल थानवी का कहना है कि ब्राजील और चीन जैसे देशों में कपास की बुवाई कम होने की खबर है. इससे दुनिया भर में कपास की कमी हो सकती है. भारत में इंपोर्ट ड्यूटी फिर से लागू होने से भी दाम बढ़े हैं. उनका मानना है कि अभी किसानों को जो अच्छा भाव मिल रहा है, उसी भाव में कपास बेच देना चाहिए.

दूसरे व्यापारी राजकुमार रूंगटा कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास का उत्पादन कम रहने की उम्मीद है. इसी वजह से व्यापारी स्टॉक कर रहे हैं और दाम बढ़ रहे हैं. सरकी के बढ़ते दाम का सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है.

अकोट मंडी के व्यापारी धीरंजन बताते हैं कि रूई और धागे की मांग अच्छी बनी हुई है. बाहर से कपास कम आ रही है, इसलिए दाम बढ़ रहे हैं. वे भी किसानों को सलाह देते हैं कि ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद न करें और अभी अच्छे दाम पर कपास बेच दें.

किसानों के लिए क्या है सही फैसला

इस समय कपास के दाम किसानों के लिए फायदेमंद हैं. अगर किसान सही समय पर अपनी फसल बेचते हैं, तो अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. बाजार के जानकारों की राय है कि बहुत ज्यादा भाव बढ़ने का इंतजार करने से नुकसान भी हो सकता है. इसलिए अभी जो दाम मिल रहे हैं, उन्हें देखकर समझदारी से फैसला लेना चाहिए.

अकोला जिले में कपास ने एक बार फिर अपनी चमक दिखाई है. कम उत्पादन, कम आवक और अंतरराष्ट्रीय कारणों से कपास के दाम ऊंचे स्तर पर पहुंचे हैं. यह किसानों के लिए राहत की खबर है. अगर किसान सही समय पर बिक्री करें, तो यह सीजन उनके लिए यादगार बन सकता है.

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