Kharif Sowing: कमजोर मॉनसून से नहीं उबरी खरीफ बुवाई, 21 लाख हेक्‍टेयर पि‍छड़ी, पढ़ें फसलों का हाल

Kharif Sowing: कमजोर मॉनसून से नहीं उबरी खरीफ बुवाई, 21 लाख हेक्‍टेयर पि‍छड़ी, पढ़ें फसलों का हाल

खरीफ सीजन में इस साल अब तक धान और कपास समेत कई प्रमुख फसलों का रकबा पिछले साल से पीछे है. 14 अगस्त तक धान की बुवाई 379.07 लाख हेक्टेयर और कपास की 107.30 लाख हेक्टेयर रही. वहीं जूट-मेस्ता का रकबा बढ़ा है, जबकि दलहन और तिलहन में मामूली गिरावट दर्ज की गई है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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कमजोर मॉनसून से नहीं उबरी खरीफ बुवाई, 21 लाख हेक्‍टेयर पि‍छड़ी, पढ़ें फसलों का हालखरीफ की बुवाई

देश में इस साल मॉनसून की धीमी शुरुआत और बारिश के असमान वितरण के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पर बुरा असर पड़ा है. हाल यह है कि बुवाई अभी पिछले साल के मुकाबले काफी पिछड़ी हुई है.  कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, 14 अगस्त 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई 1016.57 लाख हेक्टेयर में हुई है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1037.52 लाख हेक्टेयर था. इस तरह इस साल खरीफ फसलों का कुल रकबा 20.95 लाख हेक्टेयर कम दर्ज किया गया है.

कृषि मंत्रालय के मुताबिक, धान का रकबा इस साल 379.07 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 393.44 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई थी. यानी धान का क्षेत्रफल 14.37 लाख हेक्टेयर घटा है. राज्यों में कर्नाटक में 2.86 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 2.26 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 2.25 लाख हेक्टेयर और ओडिशा में 2.09 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. 

असम में धान का रकबा बढ़ा

वहीं, मध्य प्रदेश में धान का रकबा 1.64 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 1.49 लाख हेक्टेयर, तमिलनाडु में 1.17 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 1.14 लाख हेक्टेयर कम हुआ है. गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी धान का रकबा पिछले साल की तुलना में कम रहा है.

धान की बुवाई में कुछ राज्यों में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है. असम में धान का क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में 3.93 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. उत्तराखंड में भी 0.35 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दलहन के रकबे में मामूली गिरावट

दलहन की बुवाई 108.14 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 108.49 लाख हेक्टेयर थी. इस तरह दलहन का रकबा 0.35 लाख हेक्टेयर कम हुआ है. कर्नाटक में सबसे ज्यादा 4.16 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. महाराष्ट्र में 2.70 लाख हेक्टेयर, ओडिशा में 0.64 लाख हेक्टेयर, तमिलनाडु में 0.13 लाख हेक्टेयर और बिहार में 0.14 लाख हेक्टेयर की कमी रही है.

उत्तर प्रदेश में दलहन का रकबा बढ़ा

दलहन की बुवाई में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा है. यहां पिछले साल की तुलना में 4.25 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. राजस्थान में 0.93 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 0.40 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 0.35 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 0.34 लाख हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में 0.14 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है.

श्री अन्न का रकबा 4.17 लाख हेक्टेयर कम

वहीं, श्री अन्न और मोटे अनाज की बुवाई का क्षेत्रफल 172.96 लाख हेक्टेयर रहा है. पिछले साल इसी अवधि में यह 177.13 लाख हेक्टेयर था. इस तरह इस श्रेणी में 4.17 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है. कर्नाटक में सबसे बड़ी 7 लाख हेक्टेयर की गिरावट रही. महाराष्ट्र में 2.46 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.59 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 0.36 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.

राजस्थान में मोटे अनाज की बुवाई बढ़ी

आंकड़ों के मुताबिक, मोटे अनाज की बुवाई में राजस्थान में 2.15 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है. छत्तीसगढ़ में 1.53 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 0.92 लाख हेक्टेयर, ओडिशा में 0.68 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 0.62 लाख हेक्टेयर का इजाफा दर्ज किया गया है. बिहार, उत्तराखंड, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में भी इस श्रेणी का रकबा पिछले साल से अधिक रहा है.

इधर, मक्का का क्षेत्रफल 88.39 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल यह 92.06 लाख हेक्टेयर था. इस तरह मक्का का रकबा 3.67 लाख हेक्टेयर कम हुआ है. वहीं ज्वार का रकबा 0.69 लाख हेक्टेयर और बाजरे का रकबा भी 0.69 लाख हेक्टेयर बढ़ा है.

तिलहन की बुवाई में 0.89 लाख हेक्टेयर की कमी

तिलहन फसलों का कुल रकबा 184.46 लाख हेक्टेयर रहा है. पिछले साल इसी अवधि में यह 185.36 लाख हेक्टेयर था. इस तरह तिलहन की बुवाई 0.89 लाख हेक्टेयर कम हुई है. राजस्थान में सबसे ज्‍यादा 3.40 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. गुजरात में 1 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 0.56 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 0.44 लाख हेक्टेयर का रकबा घटा है. 

तिलहन की बुवाई में उत्तर प्रदेश में 3.89 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है. मध्य प्रदेश में 0.68 लाख हेक्टेयर और असम में 0.10 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है. फसलों में मूंगफली का रकबा 1.02 लाख हेक्टेयर और तिल का रकबा 1.63 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. दूसरी ओर सोयाबीन का क्षेत्रफल 1.76 लाख हेक्टेयर और अरंडी का रकबा 2.35 लाख हेक्टेयर घटा है.

गन्ने की बुवाई भी थोड़ी कम

गन्ने का क्षेत्रफल इस साल 58.31 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 58.62 लाख हेक्टेयर था. इस तरह गन्ने का रकबा 0.31 लाख हेक्टेयर कम हुआ है. उत्तराखंड में 0.20 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र और पंजाब में 0.14-0.14 लाख हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में 0.12 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा 0.36 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में 0.11 लाख हेक्टेयर बढ़ा है.

कपास की बुवाई भी पिछले साल से पीछे

जूट और मेस्ता का रकबा 6.34 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 6.23 लाख हेक्टेयर से 0.11 लाख हेक्टेयर अधिक है. इस बढ़ोतरी में बिहार की प्रमुख भूमिका रही है, जहां इस फसल का रकबा 0.11 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. 

कपास का क्षेत्रफल 107.30 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 108.26 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी. इस तरह कपास का रकबा 0.96 लाख हेक्टेयर कम है. राजस्थान में कपास का रकबा 1.09 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.90 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 0.43 लाख हेक्टेयर घटा है. महाराष्ट्र में 0.38 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 0.10 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.

कपास की बुवाई में तेलंगाना में 1.25 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. गुजरात में 0.64 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 0.11 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 0.02 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है. इसके बावजूद देश में कपास का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में कम है. 

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