जमशेदपुर में पुआल से उगाए ओएस्टर मशरूम, ग्रामीण महिलाओं ने 30 दिन में कमाए लाखों

जमशेदपुर में पुआल से उगाए ओएस्टर मशरूम, ग्रामीण महिलाओं ने 30 दिन में कमाए लाखों

जमशेदपुर में जिला कृषि विभाग ने पहली बार ग्रामीण महिलाओं को पुआल (पराली) से ओएस्टर मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग दी. 30 दिनों में तैयार होने वाले इस मशरूम की बाजार कीमत 400 रुपये प्रति किलो है. महिलाओं का दावा है कि बिना बड़ी पूंजी लगाए उन्होंने पहली ही खेप में लाखों रुपये की कमाई की है.

Advertisement
जमशेदपुर में पुआल से उगाए ओएस्टर मशरूम, ग्रामीण महिलाओं ने 30 दिन में कमाए लाखोंजमशेदपुर में ओएस्टर मशरूम की खेती

जमशेदपुर में पहली बार जिला कृषि विभाग की पहल पर ग्रामीण महिलाओं को देसी ओएस्टर मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग दी गई. खास बात यह है कि यह मशरूम उस पुआल (पराली) से तैयार किया जा रहा है, जिसे कई राज्यों में खेतों में जला दिया जाता है. झारखंड में इसी पुवाल का उपयोग कर महिलाओं ने घर बैठे रोजगार का नया मॉडल खड़ा कर दिया है.

झारखंड और बिहार में पुवाल का कई प्रकार से इस्तेमाल होता है. पशुओं के चारे से लेकर खाद बनाने और ठंड में बिस्तर के तौर पर भी. लेकिन उससे भी बढ़कर पुआल ने मशरूम उत्पादन में बड़ा रोल निभाया है. ग्रामीण क्षेत्र में इस पुआल ने किसानों की कई तरह से मदद की है. 

ऐसे तैयार होता है ओएस्टर मशरूम

ट्रेनिंग के तहत महिलाओं ने पहले पुआल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा. इसके बाद उसे बोरी में भरकर पानी और केमिकल वाले टैंक में डालकर शुद्धिकरण किया गया. 

फिर पुआल को 2-3 घंटे धूप में सुखाया गया. पूरी तरह सूखने के बाद इसे 2 किलो की प्लास्टिक बैग में भरकर उसमें ओएस्टर मशरूम का बीज डाला गया. बैग में छोटे-छोटे छेद किए गए.

करीब 7 दिन में अंकुर निकलने लगे और 30 दिन के भीतर मशरूम तैयार हो गया. बाजार में इसकी कीमत लगभग 400 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है.

महिलाओं का दावा: पहली खेप में लाखों की कमाई

दिघी गांव की ज्योत्सना महतो ने बताया कि पहली बार मशरूम उत्पादन कर उन्होंने करीब एक लाख रुपये तक की कमाई की. उनका कहना है कि बिना बड़ी पूंजी लगाए यह आय संभव हुई है.

मशरूम उगाने वाले किसान ठना महतो ने भी कहा कि 30 दिनों में तैयार फसल से अच्छी आमदनी हुई है और यह मॉडल काफी फायदेमंद साबित हो रहा है.

सरकारी पहल से जुड़ी महिलाएं

जिला कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, झारखंड सरकार की पहल पर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण दिया गया है.

जिला पदाधिकारी अनामिका लकड़ा (DHO) ने बताया कि जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में कई स्थानों पर महिलाओं को पुआल से मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग दी जा रही है.

उन्होंने कहा कि जिस पराली को दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे राज्यों में जलाया जाता है, उसी का उपयोग झारखंड में आय के साधन के रूप में किया जा रहा है.

पर्यावरण के साथ आय का संतुलन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल दोहरे फायदे वाला है-एक तरफ पराली जलाने की समस्या का समाधान, दूसरी तरफ ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का अवसर.

30 दिन में तैयार होने वाला ओएस्टर मशरूम पौष्टिक होने के साथ-साथ बाजार में अच्छी कीमत दिला रहा है, जिससे महिलाओं में उत्साह देखा जा रहा है.(अनूप सिन्हा का इनपुट)

POST A COMMENT