चाय के किसानों को बड़ी राहतभारत में चाय बहुत पसंद की जाती है और यह कई लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन भी है. लेकिन पिछले कुछ समय से बाहर के देशों से सस्ती और कम गुणवत्ता वाली चाय भारत में आ रही है. इससे भारतीय चाय किसानों और चाय उद्योग को नुकसान हो रहा है. इसी समस्या को देखते हुए टी बोर्ड ऑफ इंडिया ने एक बड़ा फैसला लिया है.
टी बोर्ड ऑफ इंडिया ने कहा है कि 1 मई 2026 से भारत में आने वाली हर चाय की खेप की जांच करना जरूरी होगा. इसका मतलब यह है कि जो भी चाय विदेश से भारत आएगी, पहले उसकी गुणवत्ता की जांच की जाएगी. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खराब या मिलावटी चाय भारत में न बिके. टी बोर्ड ने इस बारे में एक नियम और प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है.
भारतीय चाय उद्योग लंबे समय से यह शिकायत कर रहा था कि नेपाल, केन्या और अफ्रीका के कुछ देशों से बहुत सस्ती और घटिया चाय भारत लाई जा रही है. यह चाय बिना टैक्स के आती है और बहुत कम दाम में बिकती है. इससे भारतीय किसानों को उनकी चाय का सही दाम नहीं मिल पाता और उन्हें आर्थिक परेशानी होती है. खासकर छोटे चाय किसान इससे बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.
टी बोर्ड ने बताया कि जो भी व्यक्ति या कंपनी चाय आयात करना चाहती है, उसे टी बोर्ड के पास पंजीकृत होना जरूरी है. आयातक को चाय आने की तारीख, चाय रखने का गोदाम, कंटेनरों की संख्या और बिल की जानकारी टी काउंसिल पोर्टल पर देनी होगी. इसके साथ ही चाय की कीमत, भाड़ा और बीमा का पूरा ब्योरा भी देना होगा.
चाय आयात करने वाले को हर सैंपल के लिए 11,120 रुपये और उस पर जीएसटी देना होगा. यह फीस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जमा करनी होगी. आवेदन करते समय आयातक को उस पैकेट की फोटो भी अपलोड करनी होगी, जिसमें चाय को फिर से बाहर भेजा जाएगा. इससे चाय की पहचान और जांच आसान हो जाएगी.
जब चाय की खेप भारत के बंदरगाह पर पहुंचेगी, तब 24 घंटे के अंदर टी बोर्ड का अधिकारी वहां पहुंचकर चाय के नमूने लेगा. पांच कंटेनरों के एक समूह में से किसी एक कंटेनर को बिना बताए चुना जाएगा. उसी से दो सैंपल लिए जाएंगे और उनकी जांच की जाएगी. इससे यह पता चलेगा कि चाय खाने के लिए सुरक्षित है या नहीं.
छोटे चाय किसानों की संस्था CISTA के अध्यक्ष बिजॉय गोपाल चक्रवर्ती ने इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि इससे खराब और बिना मानक वाली चाय भारत में आने से रुकेगी. इससे भारतीय चाय की पहचान बनी रहेगी और किसानों को फायदा होगा.
भारत की मशहूर दार्जिलिंग चाय भी इस समय परेशानी में है. नेपाल में उगाई जाने वाली चाय दार्जिलिंग चाय से लगभग 50 प्रतिशत सस्ती होती है. इसी वजह से बाजार में लोग सस्ती चाय खरीद लेते हैं और दार्जिलिंग चाय की मांग कम हो रही है. दार्जिलिंग चाय भारत की पहली चाय है जिसे GI टैग मिला था, यानी यह खास पहचान वाली चाय है.
टी बोर्ड का यह फैसला भारतीय चाय उद्योग और किसानों के लिए बहुत जरूरी और फायदेमंद है. इससे अच्छी गुणवत्ता वाली चाय को बढ़ावा मिलेगा और खराब चाय पर रोक लगेगी. यह कदम बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए सुरक्षित और अच्छी चाय सुनिश्चित करेगा.
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