सोयाबीन की फसल पर संकटमहाराष्ट्र के जालना जिले के जामवाड़ी इलाके में बारिश के अभाव में सोयाबीन और कपास की फसल प्रभावित हुई है. किसानों का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ से दो महीने से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी है. कई जगह सोयाबीन की फसल पूरी तरह सूख गई है, जबकि कई किसान कपास की फसल में भी फूल और बोंड गिरने की शिकायत कर रहे हैं. बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन में दाना भरने की मात्रा भी कम रही है, जिससे किसानों ने उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका जताई है.
जामवाड़ी के किसानों के मुताबिक, फसल पर खाद, बीज और अन्य कृषि खर्च बढ़ गया है. लेकिन बारिश के अभाव में फसल की स्थिति खराब होने से अब लागत भी निकलने की उम्मीद कम है. किसानों ने सरकार से खेतों में हुए नुकसान के लिए आर्थिक मदद देने की मांग की है. किसानों ने प्रति हेक्टेयर 75 हजार रुपये सहायता, विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस माफ करने और पशुओं के चारे की समस्या दूर करने की भी मांग की है.
जामवाड़ी के किसान नारायण वाडेकर के मुताबिक, उनकी करीब ढाई एकड़ जमीन है. इसमें उन्होंने कपास, सोयाबीन के साथ फलदार फसलें भी लगाई हैं. उन्होंने बताया कि फसल पर प्रति एकड़ करीब 30 से 40 हजार रुपये खर्च आया है. लेकिन बारिश के अभाव में अब सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत उत्पादन होने की उम्मीद है. ऐसे में खेती पर किया गया खर्च भी निकलना मुश्किल है. नारायण वाडेकर का कहना है कि पानी की कमी के कारण फलदार फसलों को बचाना भी मुश्किल हो रहा है. उन्होंने सरकार से किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने, प्रति हेक्टेयर 75 हजार रुपये मदद देने और विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस माफ करने की मांग की है. साथ ही पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग भी उन्होंने की है.
जामवाड़ी के किसान गौतम लांडगे के मुताबिक, करीब डेढ़ से पौने दो महीने से बारिश नहीं हुई है. उनकी ढाई एकड़ जमीन में डेढ़ एकड़ कपास और एक एकड़ सोयाबीन की फसल है. बारिश के अभाव में सोयाबीन पूरी तरह सूख गई है, जबकि कपास के फूल और पत्तियां भी गिर रही हैं. गौतम लांडगे के मुताबिक, डेढ़ एकड़ कपास से पहले 15 से 20 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद थी. लेकिन अब करीब 5 क्विंटल उत्पादन भी होगा या नहीं, इसे लेकर चिंता है.
उन्होंने बताया कि खेती पर करीब 75 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं और बढ़ती खाद की कीमतों से आर्थिक स्थिति और बिगड़ी है. किसान गौतम लांडगे ने सरकार से बिना किसी शर्त के आर्थिक सहायता देने, प्रति हेक्टेयर 75 हजार रुपये मदद करने और विद्यार्थियों की पढ़ाई की फीस माफ करने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर सरकार से मदद नहीं मिली तो किसानों के लिए इस साल दशहरा और दिवाली मनाना भी मुश्किल होगा.
किसान गणेश लांडगे के मुताबिक, उन्होंने अपनी जमीन में सोयाबीन और कपास की फसल लगाई थी. खेती पर 80 से 95 हजार रुपये से अधिक खर्च आया है. लेकिन बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन पूरी तरह सूख गई है और कपास की फसल को भी नुकसान पहुंचा है. गणेश लांडगे के मुताबिक, कपास के पौधों पर इस बार सिर्फ एक से दो बोंड ही लगे हैं. वहीं, कपास में आए फूल भी पानी की कमी के कारण गिर रहे हैं. ऐसे में फसल पर किया गया खर्च भी वापस मिलने की उम्मीद नहीं है. उन्होंने बताया कि अगस्त महीने से जामवाड़ी इलाके में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. इससे किसान बेहद चिंतित हैं. गणेश लांडगे ने सरकार से फसल नुकसान के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग की है.
किसान प्रभाकर लांडगे के मुताबिक, जालना तालुका और जामवाड़ी इलाके में करीब दो महीने से बारिश नहीं हुई है. इसका सीधा असर खेती के साथ-साथ पशुओं के चारे पर भी पड़ा है. उन्होंने करीब पौने चार से चार एकड़ जमीन में पशुओं के लिए मक्का लगाई थी. लेकिन बारिश नहीं होने के कारण मक्का की फसल बढ़ नहीं पाई. इसके बाद उन्होंने मक्के की फसल काटकर पशुओं को खिला दी. प्रभाकर लांडगे के मुताबिक, गांव में सोयाबीन और कपास की फसल को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि खेती पर करीब 75 हजार रुपये खर्च आया, लेकिन यह खर्च भी निकलना मुश्किल है. ऐसे में उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ पशुओं के चारे की समस्या दूर करने की मांग की है.
जामवाड़ी इलाके में बारिश के अभाव में सोयाबीन और कपास की फसल प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि इस साल बारिश नहीं होने से खरीफ फसल का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा. अब किसानों की नजर सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today