मसालों की खेती से किसानों की बढ़ी कमाई, ITC की पहल से हजारों किसानों को मिला फायदा

मसालों की खेती से किसानों की बढ़ी कमाई, ITC की पहल से हजारों किसानों को मिला फायदा

आईटीसी की मसाला खेती योजना से देश के हजारों किसानों को बड़ा फायदा मिला है. कंपनी किसानों को आधुनिक और ऑर्गेनिक खेती सिखा रही है, जिससे उनकी फसल और कमाई दोनों बढ़ी हैं. आंध्र प्रदेश के गुंटूर में बने बड़े मसाला प्रोसेसिंग सेंटर के जरिए भारतीय मसालों को विदेशों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे किसानों को नए बाजार मिल रहे हैं.

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मसालों की खेती से किसानों की बढ़ी कमाई, ITC की पहल से हजारों किसानों को मिला फायदामसालों की खुशबू से बदली किसानों की किस्मत!

देश में मसालों की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. बड़ी कंपनी ITC ने बताया है कि उसकी खास मसाला खेती योजना से अब तक 31 हजार 800 से ज्यादा किसानों को फायदा मिला है. इन किसानों ने करीब 2.2 लाख एकड़ जमीन पर मसालों की खेती की है. इस योजना की मदद से किसानों की फसल अच्छी हुई, खेती का तरीका बेहतर बना और उनकी कमाई भी बढ़ी है. कंपनी का कहना है कि किसानों को अब अपने मसाले विदेशों तक बेचने का मौका भी मिल रहा है, जिससे उन्हें ज्यादा पैसा मिल रहा है.

किसानों को सिखाई जा रही नई खेती

आईटीसी किसानों को केवल खेती करने के लिए नहीं कह रही, बल्कि उन्हें अच्छी और सुरक्षित खेती करना भी सिखा रही है. किसानों को बताया जा रहा है कि कम खर्च में अच्छी फसल कैसे उगाई जाए. उन्हें जैविक यानी ऑर्गेनिक खेती के बारे में भी जानकारी दी जा रही है. इससे मिट्टी खराब नहीं होती और फसल भी अच्छी होती है.

कंपनी किसानों को मसालों की सही देखभाल, सही खाद का उपयोग और पानी बचाने के तरीके भी सिखा रही है. इससे किसानों का खर्च कम हो रहा है और उन्हें ज्यादा फायदा मिल रहा है. कई किसान अब मिर्च, हल्दी, धनिया और दूसरे मसालों की खेती करके अच्छी कमाई कर रहे हैं.

भारत बना ऑर्गेनिक मसालों का बड़ा निर्यातक

आईटीसी ने बताया कि साल 2025 में वह भारत से सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक मसाले विदेश भेजने वाली कंपनी बनी. इसका मतलब है कि दुनिया के कई देशों में भारतीय मसालों की मांग बढ़ रही है. विदेशों में लोग भारत के मसालों को बहुत पसंद कर रहे हैं.

कंपनी का कहना है कि भारतीय मसालों की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है. अगर किसानों को सही मदद और सही बाजार मिले, तो वे दुनिया भर में अपने मसाले बेच सकते हैं. इससे किसानों की आय और ज्यादा बढ़ सकती है.

गुंटूर में बना बड़ा मसाला प्रोसेसिंग सेंटर

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में आईटीसी ने मसालों को तैयार करने का बहुत बड़ा केंद्र बनाया है. यह एशिया के सबसे बड़े मसाला प्रोसेसिंग सेंटरों में से एक माना जाता है. यह लगभग 6 एकड़ में फैला हुआ है और यहां हर साल 20 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा मसालों की प्रोसेसिंग की जा सकती है.

इस केंद्र में 15 से ज्यादा तरह के मसालों पर काम किया जाता है. यहां मसालों की सफाई, पैकिंग और जांच की जाती है ताकि अच्छी गुणवत्ता वाले मसाले बाजार और विदेशों में भेजे जा सकें. खास बात यह है कि यहां ऑर्गेनिक मसालों के लिए अलग व्यवस्था की गई है.

बारकोड से होगी हर मसाले की पहचान

आईटीसी ने अपने इस केंद्र में नई तकनीक का भी इस्तेमाल किया है. हर मसाले की जानकारी बारकोड के जरिए रखी जाती है. इससे यह पता चल जाता है कि मसाला किस किसान के खेत से आया है और उसकी प्रोसेसिंग कैसे हुई है.

इससे ग्राहकों को भरोसा मिलता है कि उन्हें अच्छी और सुरक्षित चीज मिल रही है. साथ ही किसानों को भी फायदा होता है क्योंकि उनके उत्पाद की सही पहचान बनती है.

किसानों की कमाई में हुआ बड़ा सुधार

आईटीसी के इस कार्यक्रम का असर किसानों की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 सालों में इस योजना से जुड़े किसानों की आय में करीब 42 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है. किसानों की कमाई इसलिए बढ़ी क्योंकि उनकी फसल अच्छी हुई, खेती का खर्च कम हुआ और उन्हें अच्छे बाजार मिले.

कई किसानों ने बताया कि पहले उन्हें अपने मसालों का सही दाम नहीं मिलता था, लेकिन अब उनकी मेहनत का अच्छा पैसा मिल रहा है. इससे उनके परिवार की जिंदगी भी बेहतर हुई है.

खेती को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम

आईटीसी का कहना है कि उसका लक्ष्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को मजबूत बनाना भी है. कंपनी चाहती है कि किसान खेती से अच्छा पैसा कमाएं और नई तकनीक का फायदा उठाएं.

कंपनी के अधिकारी एस गणेश कुमार ने कहा कि किसान देश की ताकत हैं और उन्हें आगे बढ़ाना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि मसालों की खेती भारत के किसानों के लिए बड़ा अवसर बन सकती है. अगर सही तरीके से काम किया जाए तो भारतीय मसाले पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं.

आईटीसी की यह पहल किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही है. इससे खेती आधुनिक बन रही है और किसानों की जिंदगी में खुशहाली आ रही है.

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