भारत से दुबई पहुंची तेजपुर लीचीभारत ने एक बार फिर कृषि निर्यात के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. बिहार के बाद अब असम के तेजपुर से GI (Geographical Indication) टैग प्राप्त एक टन लीची दुबई भेजी गई है. यह कदम भारत के उत्तरी-पूर्वी राज्यों के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की दिशा में जरूरी माना जा रहा है. यह लीची अपनी खास मिठास, चमकदार लाल रंग और मनमोहक खुशबू के लिए जानी जाती है, जिसकी विदेशों में भी काफी मांग है.
असम का तेजपुर क्षेत्र लीची उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. यहां कई बेहतरीन किस्में उगाई जाती हैं, जैसे बॉम्बैया, बिलाती, इलायची, पियाजी और साही. इन सभी किस्मों की अपनी अलग पहचान और स्वाद होता है. खास बात यह है कि यहां की लीची प्राकृतिक रूप से अधिक मीठी और रसदार होती है, जिससे यह बाजार में अन्य लीची से अलग मानी जाती है.
तेजपुर लीची को मिला GI टैग इस फल की पहचान को और मजबूत बनाता है. GI टैग किसी भी उत्पाद को उसकी खास जगह और गुणवत्ता से जोड़कर उसकी अलग पहचान देता है. इसी कारण अब तेजपुर लीची को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पहचान मिल रही है. इससे विदेशी खरीदारों का भरोसा भी बढ़ा है और इसके निर्यात के नए अवसर खुल रहे हैं.
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, सरकार पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है. इसका उद्देश्य किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर दाम दिलाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है. तेजपुर लीची का दुबई निर्यात इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
सरकार की कोशिश है कि असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के किसान अपनी उपज को सीधे वैश्विक बाजार में बेच सकें, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो.
तेजपुर लीची के निर्यात से स्थानीय किसानों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. अब उनकी उपज सिर्फ देश के बाजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ेगी. इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के निर्यात को लगातार बढ़ावा दिया जाए, तो पूर्वोत्तर भारत कृषि निर्यात का बड़ा केंद्र बन सकता है.
दुबई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय लीची की पहुंच यह दिखाती है कि भारत के कृषि उत्पाद अब वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बना रहे हैं. तेजपुर लीची जैसे उत्पाद भारत की कृषि विविधता और गुणवत्ता को दर्शाते हैं.
यह कदम न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है.
तेजपुर लीची का GI टैग के साथ दुबई निर्यात भारत के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे किसानों को नए बाजार मिलेंगे, आय बढ़ेगी और भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत होगी. यह सफलता आने वाले समय में अन्य कृषि उत्पादों के लिए भी नए अवसर खोल सकती है.
ये भी पढ़ें:
Akola Urea Crisis: रात 3 बजे से लाइन में खड़े किसान, यूरिया की एक बोरी के लिए हो रहा संघर्ष
हरियाणा मंडी सिस्टम में बड़ा विवाद: NOC और कच्ची पर्ची को लेकर नया घमासान
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today