
Farmers protesting against garlic pricesमध्य प्रदेश में मंदसौर जिले के सुपड़ा गांव के लहसुन किसानों ने विरोध जताने का अनोखा रास्ता अपनाया. उन्होंने लहसुन की फसल को कफन से ढककर, फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी. किसान लहसुन की कीमतों में भारी गिरावट का विरोध कर रहे थे. उनका कहना है कि अगर सरकार मदद नहीं करती है तो उनका जिंदा रहना मुश्किल है.
एक किसान, अनिल शर्मा ने कहा कि किसान 54 और 55 हजार रुपये क्विंटल लहसुन ला कर खेती करता है. खेतों में बुआई, निराई, गुड़ाई, और कीटनाशक का छिड़काव आदि पर बहुत खर्च होता है. आज किसानों को लागत मूल्य तो दूर की बात है, मजदूरों की मजदूरी भी नहीं निकल रही है. ऐसी स्थिति में किसानों ने विरोध स्वरूप दर्शन किया है. लहसुन के ऊपर कफन ओढ़ा कर और माला चढ़ा कर श्रद्धांजलि अर्पित की है. किसानों को जब सही भाव नहीं मिल रहा है तो ये लहसुन और किसान- दोनों लगभग मरने ही वाले हैं.

उत्पादन केंद्र के बावजूद नहीं बढ़े रेट
केंद्र सरकार के 'एक जिला, एक उत्पाद' योजना के तहत मंदसौर में प्रमुख लहसुन उत्पादन केंद्र है. फिर भी यहां लहसुन की कीमत काफी कम है, जिसका किसानों को भारी मलाल है. किसानों ने कहा कि विरोध तो इसलिए किया है कि लहसुन का भाव नहीं मिल रहा है. उन्होंने सरकार से मांग की है और लहसुन पर पुष्प माला चढ़ा और श्रद्धांजलि देकर विरोध दर्शाया. लहसुन को आज भाव नहीं मिल रहा है तो किसान मानो मर चुका है.
किसान को न सोयाबीन के भाव मिल रहे हैं, ना गेहूं के भाव मिल रहे हैं, ना मूंगफली के भाव मिल रहे हैं. किसानों ने बताया कि उन्हें मुश्किल से लहसुन का साढ़े तीन-चार हजार रुपये क्विंटल मिल रहे हैं. किसानों ने सरकार से लहसुन की उचित कीमत दिलाने की अपील की है, ताकि कम से कम उनकी लागत निकल जाए और वे लहसुन की खेती जारी रखें.
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