कपास की खेतीभारत में कपास की खेती काफी बड़े पैमाने पर की जाती है. यहां पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई अन्य राज्यों के कपास की खेती मुख्य तौर पर की जाती है. लेकिन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने मध्य भारत में उम्मीद से कम फसल होने के कारण 2024-25 के लिए अपनी फसल अनुमान को 2 प्रतिशत घटा दिया है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने फसल अनुमान को घटाकर अब 295.30 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) कर दिया है, जो पहले के अनुमान 301.75 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) से कम है. वहीं, क्षेत्र में लगभग 10 फीसदी की गिरावट के कारण इस साल कपास की खेती में पिछले सीजन के 327.45 लाख गांठ से घटकर 295.30 लाख गांठ रहने का अनुमान है. इससे देश में सूती कपड़ों के दाम बढ़ने की आशंका है.
इसी बीच सरकार ने सोमवार को अपने दूसरे अग्रिम अनुमान में 2024-25 के लिए 299 लाख गांठ के पहले के पूर्वानुमान से 1.5 फीसदी घटाकर 294.25 लाख गांठ कपास की खेती का अनुमान लगाया है. ऐसे में नए अनुमानों के अनुसार, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया को उम्मीद है कि गुजरात में कपास की प्रेसिंग 4 लाख गांठ और महाराष्ट्र में 3 लाख गांठ कम होगी, जबकि ओडिशा में 0.55 लाख गांठ की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.
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कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल गनात्रा ने एक बयान में कहा है कि सितंबर में समाप्त होने वाले 2024-25 सीजन के दौरान कपास का आयात दोगुना होकर 32 लाख गांठ होने की उम्मीद है, जो पिछले सीजन में 15.20 लाख गांठ था, वहीं, फरवरी के अंत तक देश में करीब 22 लाख कपास के गांठ का आयात किया जा चुका है.
‘बिजनेसलाइन’ के मुताबिक, सीएआई ने 2024-25 सीजन के लिए अपनी घरेलू खपत 315 लाख गांठ पर बरकरार रखी है, जो फरवरी के अंत तक खपत 142 लाख गांठ होने का अनुमान था. साथ ही निर्यात पिछले साल के 28.36 लाख गांठ से 40 फीसदी कम होकर 17 लाख गांठ रह गया है. ऐसे में कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया को उम्मीद है कि 30 सितंबर, 2025 को समाप्त होने वाले सीजन के अंत में समापन स्टॉक पिछले वर्ष के 30.19 लाख गांठों की तुलना में कम होकर 23.49 लाख गांठ रह जाएगा.
भारत में कपास उत्पादन में कटौती लगातार जारी है. इस गिरावट के कारण आयात में वृद्धि और निर्यात में गिरावट देखी जा रही है. साथ ही इससे बाजार में बदलाव देखने को मिल रहा है. वहीं, स्टॉक में कमी के कारण घरेलू कीमतें स्थिर रह सकती हैं, जिसका असर आने वाले महीनों में सूती कपड़ों के उद्योग पर पड़ सकता है.
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