तमिलनाडु और आंध्र के चावल में नहीं मिला एफ्लाटॉक्सिन, अब निर्यात की सभी अड़चनें दूर

तमिलनाडु और आंध्र के चावल में नहीं मिला एफ्लाटॉक्सिन, अब निर्यात की सभी अड़चनें दूर

यूरोपीय संघ, अमेरिका और भारत (एफएसएसएआई) के लिए एफ्लाटॉक्सिन का निर्धारित अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) अलग-अलग हैं. यूरोपीय संघ द्वारा निर्धारित MRL 2 mg/kg, अमेरिका द्वारा 20 mg/kg और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा 10 mg/kg है. इन अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन में कुछ मामलों में अंतर देखा गया है, लेकिन तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से निर्यातित चावल में इन निर्धारित स्तरों में कोई गड़बड़ी है.

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तमिलनाडु और आंध्र के चावल में नहीं मिला एफ्लाटॉक्सिन, अब निर्यात की सभी अड़चनें दूरइन देशों के चावल में नहीं मिला एफ्लाटॉक्सिन

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के निर्यातकों द्वारा यूरोपीय संघ (EU) को भेजे गए चावल में एफ्लाटॉक्सिन (एक प्रकार की फफूंद) का कोई अंश नहीं पाया गया है. यह दावा भारतीय चावल निर्यातकों के लिए एक राहत की खबर है, खासकर यूरोपीय संघ जैसे महत्वपूर्ण बाजारों में निर्यात की क्वालिटी के मायनों में.

क्या है एफ्लाटॉक्सिन?

एफ्लाटॉक्सिन एक प्रकार की फफूंद है जो हानिकारक जहरीला पदार्थ है, जो विशेष रूप से मोल्ड्स द्वारा उत्पन्न होता है. यह खाद्य पदार्थों, खासकर अनाजों और सूखे मेवों में पाया जा सकता है. यह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है और इसकी उच्च मात्रा मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, जैसे कि लीवर की बीमारियां और कैंसर का खतरा. इस कारण से, अलग-अलग देशों द्वारा अपने आयातित खाद्य पदार्थों के लिए एफ्लाटॉक्सिन के अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) निर्धारित किए गए हैं.

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यूरोप और अन्य देशों में निर्धारित MRL

जितिन प्रसाद ने अपने उत्तर में यह भी बताया कि यूरोपीय संघ, अमेरिका और भारत (एफएसएसएआई) द्वारा एफ्लाटॉक्सिन के लिए निर्धारित अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) अलग-अलग हैं. यूरोपीय संघ द्वारा निर्धारित MRL 2 mg/kg, अमेरिका द्वारा 20 mg/kg और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा 10 mg/kg है. इन अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन में कुछ मामलों में अंतर देखा गया है, लेकिन तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से निर्यातित चावल में इन निर्धारित स्तरों में कोई अंतर नहीं देखा गया है, जो निर्यातकों के लिए एक बड़ी सफलता है.

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चावल निर्यात में बढ़ोतरी

भारत से यूरोपीय संघ को चावल निर्यात की मात्रा में 2019 से 2023 तक 111 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है. खासकर गैर-बासमती चावल के निर्यात में 500 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो एशियन देशों की तुलना में बहुत अधिक है. यह बढ़त भारतीय चावल निर्यातकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है और इसका श्रेय खेती की अच्छी विधियों और मानक नियमों के पालन को जाता है.

कैसे किया जा रहा नियंत्रण?

सरकार ने यह भी बताया कि धान उत्पादक किसानों के लिए कृषि-संस्कृति विभाग और कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे यूरोपीय संघ और अन्य आयातक देशों द्वारा निर्धारित MRL का पालन करें. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को अच्छी कृषि पद्धतियों (Good Agricultural Practices - GAP) को अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे कृषि रसायनों का सही ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो सके और एफ्लाटॉक्सिन जैसे जोखिमों से बचाव हो सके.

ये भी जानें

  • यूरोपीय संघ द्वारा एफ्लाटॉक्सिन के लिए निर्धारित MRL क्या है?
  • यूरोपीय संघ द्वारा एफ्लाटॉक्सिन के लिए अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) 2 mg/kg निर्धारित किया गया है.
  • भारत से यूरोपीय संघ को चावल निर्यात में कितनी वृद्धि हुई है?
  • 2019 से 2023 के बीच, भारत से यूरोपीय संघ को चावल निर्यात में 111 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
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