केला की कीमत में लगातार जारी उछाल ने ग्राहकों को परेशान करना शुरू कर दिया है. जबकि, कीमतों में अभी और उछाल की आशंका जताई जा रही है. केला की महंगाई दर नवंबर में बढ़कर 16.5 फीसदी पहुंच गई. केला की आपूर्ति कम होने से कीमतें प्रभावित हो रही हैं. महाराष्ट्र में अनियमित मौसम और बीमारियों के प्रकोप ने केला की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है, जबकि बिहार के केला किसान उपज का सही दाम नहीं मिलने से मक्का बुवाई की ओर रुख कर रहे हैं.
दिसंबर में जारी महंगाई दर के आंकड़ों के अनुसार केले की मुद्रास्फीति नवंबर में बढ़कर 16.5 फीसदी पहुंच गई. यह महंगाई दर 4 महीने पहले 2.2 फीसदी थी. व्यापारियों ने कहा कि खुदरा कीमतें अब 30 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास हैं, जो अक्टूबर में 18-20 रुपये थी.विशेषज्ञ संकेत दे रहे हैं कि केले की कीमतों में और तेजी आ सकती है. दिल्ली की आजादपुर मंडी में केले की मॉडल कीमत 6 जनवरी 2024 को 2,900 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई, जबकि अक्टूबर 2023 में यह कीमत 1,800 रुपये प्रति क्विंटल थी.
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार बनाना ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीवी पाटिल ने कहा है कि कीमतों में बढ़ोत्तरी से मुद्रास्फीति का गणित गड़बड़ा सकता है. नवंबर 2023 में फलों की मुद्रास्फीति लगभग 11 फीसदी पर थी. आपूर्ति पर दबाव के चलते फलों की मुद्रास्फीति ऊंची रह सकती है. भारत में केले का वार्षिक उत्पादन 35.36 मीट्रिक टन है. इसमें से वित्त वर्ष 2023-24 में केवल 1 फीसदी निर्यात किया गया है. हालांकि, पिछले 4 वर्षों में ही केले का निर्यात लगभग तीन गुना बढ़ गया है.
केला ट्रेडर्स और केला उत्पादकों ने कहा कि बेमौसम बारिश और बीमारी के प्रकोप के कारण कुछ क्षेत्रों में उत्पादन 15-30 फीसदी तक प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतों में उछाल आया है. महाराष्ट्र के जलगांव में केला की खेती करने वाले मोजेक वायरस से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. जबकि, सितंबर 2023 में बेमौसम बारिश ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है. बिहार में केला किसान उत्पादन और लागत नहीं निकलने के चलते मक्का बुवाई की ओर ट्रांसफर हो गए हैं. क्योंकि, मक्का की मांग पोल्ट्री फीड और इथेनॉल के कारण खूब है.
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