यूपी में शीतलहर के प्रकोप से किसान परेशान, कृषि विशेषज्ञ से जानिए फसलों को बचाने के उपाय

यूपी में शीतलहर के प्रकोप से किसान परेशान, कृषि विशेषज्ञ से जानिए फसलों को बचाने के उपाय

Cold waves in UP: एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक, सर्दियों में झुलसा रोग लगने की संभावना फसलों में अधिक होती है. ऐसे में किसान अपनी फसलों की निगरानी करता रहे. उन्होंने बताया कि अगर पत्तियों पर काले रंग का दाग नजर आता है, तो फौरन इस पर फंगीसाइड नाम की दवा का छिड़काव करें.

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यूपी में शीतलहर के प्रकोप से किसान परेशान, कृषि विशेषज्ञ से जानिए फसलों को बचाने के उपायकड़ाके की ठंड और कोहरा बढ़ने के साथ फसलों पर रोगों का खतरा भी मंडराने लगा है.

उत्तर प्रदेश में तापमान तेजी से गिरने लगा है. आलम ये है कि कई इलाकों में तापमान 5 डिग्री सेल्सियत तक पहुंच गया है. बढ़ते शीतलहर से फसलों के नुकसान पहुंचाने का खतरा भी बढ़ गया है. इसके चलते सरसों, आलू, समेत कई फसलें प्रभावित हो सकती हैं. वहीं, गेहूं की फसल के लिए यह ठंड फायदेमंद बताई जा रही है. इंडिया टुडे के किसान तक से बातचीत में रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के सहायक विकास अधिकारी कृषि दिलीप कुमार सोनी ने बताया कि पाला गिरने से सबसे ज्यादा असर आलू पर होता हैं, वहीं टमाटर, पालक, मूली, पत्ता गोभी, फूल गोभी समेत कई सब्जियों और फसलों पर रोग लगने की संभावना अधिक बढ़ जाती है. जबकि अधिक कोहरा होने से सरसों की फसल को कई तरह के रोग का खतरा होता है.

सर्दियों में झुलसा रोग लगने की संभावना

उन्होंने बताया कि इन फसलों के रोकधाम के लिए सबसे सरल उपाय है कि खेतों के किनारे कूड़ा-करकट या घास-फूस जलाकर धुआं पैदा कर खेत के तापमान में कुछ बढ़ोतरी कर सकते हैं.जिससे फसलों को नुकसान नहीं होगा. दूसरा समय-समय पर सिंचाई करते रहे. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक, सर्दियों में झुलसा रोग लगने की संभावना फसलों में अधिक होती है. ऐसे में किसान अपनी फसलों की निगरानी करता रहे. उन्होंने बताया कि अगर पत्तियों पर काले रंग का दाग नजर आता है, तो फौरन इस पर फंगीसाइड नाम की दवा का छिड़काव करें.

गेहूं की फसल के लिए यह ठंड फायदेमंद

वहीं गेहूं की फसल के लिए यह ठंड फायदेमंद साबित होती हैं, क्योंकि जितना अधिक ठंडा पड़ेगा उतनी अच्छी गेहूं की पैदावार होगी. कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, ठंड में बढ़ोतरी गेहूं की फसल में टिलरिंग यानी अंकुरण को बढ़ावा देती है, जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है. सहायक विकास अधिकारी कृषि दिलीप कुमार सोनी बताते हैं कि मौसम में आया अचानक बदलाव सब्जी, सरसों और गन्ने जैसी फसलों के लिए हानिकारक होता है. ऐसे में किसानों को हल्की सिंचाई करनी चाहिए, जिससे ठंड के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है.

फसलों को पाले से बचाने के उपाय 

उन्होंने बताया कि फसल को प्लास्टिक की चादर से कवर कर सकते हैं. ऐसा केवल रात के समय करना चाहिए.दिन के समय इस चादर को हटा देना चाहिए, जिससे पौधे के प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेगी. वहीं पाले से बचने के लिए जली लकड़ी से बनने वाली राख का फसल पर छिड़काव से खेत में गर्मी बनती है.

शीतलहर की चपेट में उत्तर प्रदेश

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में सर्द हवाओं संग ठंड की शुरुआत हो चुकी हैं. आईएमडी ने लगभग 20 से ज्यादा जिलों में पाला पड़ने और अत्यधिक ठंड की चेतावनी जारी की है. वहीं 50 जिलों में शीतलहर की चेतावनी है. इससे पहले गुरुवार को अयोध्या, बरेली, झांसी, गोरखपुर, बलिया और बहराइच आदि जिले सर्द हवाओं संग शीतलहर की चपेट में रहे. वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाओं के असर से शीतलहर के अगले तीन से चार दिन तक चलने और पारे में अभी और गिरावट के आसार हैं.

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