बंपर बारिश से किसान खुश, 98 फीसदी पूरी हुई धान की रोपाई, इस किस्म की ज्यादा है डिमांड

बंपर बारिश से किसान खुश, 98 फीसदी पूरी हुई धान की रोपाई, इस किस्म की ज्यादा है डिमांड

कृषि कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोंकण क्षेत्र के अलावा पुणे जिले में धान की बड़े स्तर पर खेती होती है. हालांकि, पारंपरिक रूप से मावल और मुलशी तहसीलें धान की उच्च गुणवत्ता वाली अंबेमोहर किस्मों की खेती के लिए जानी जाती हैं. लेकिन अब, अधिकांश किसान बाजार में अधिक कीमत और ज्याद मांग की वजह से इंद्रायणी किस्म की ओर रुख कर रहे हैं.

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बंपर बारिश से किसान खुश, 98 फीसदी पूरी हुई धान की रोपाई, इस किस्म की ज्यादा है डिमांडइस साल धान की हुई बंपर रोपाई. (सांकेतिक फोटो)

इस बार अच्छी बारिश होने की वजह से खरीफ फसलों की बुवाई अभी भी जारी है. महाराष्ट्र के पुणे जिले में धान की रोपाई अब तक औसत के 98 फीसदी तक पहुंच गई है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि धान के रकबे में अभी और बढ़ोतरी होगी. जिला कृषि कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में धान की खेती का औसत रकबा 59,627 हेक्टेयर है. भोर, अम्बेगांव, जुन्नार और पुरंदर तहसील में लगभग 100 फीसदी धान की रोपाई पूरी हो गई है. एक अधिकारी ने कहा कि अन्य धान उत्पादक तहसीलें अपना औसत रोपाई पूरा करने के कगार पर हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला कृषि अधिकारी संजय कचोले ने बताया कि धान उत्पादकों के लिए इस साल का मौसम बहुत ही अच्छा रहा. हमने 19 अगस्त तक 58,626 हेक्टेयर में धान की बुवाई की है. अगले सप्ताह तक हम औसत खेती पूरी कर लेंगे. यह धान उत्पादकों के लिए एक सकारात्मक विकास है. उन्होंने कहा कि पिछले साल, धान उत्पादकों को मुश्किल समय का सामना करना पड़ा था, क्योंकि वे खराब बारिश के कारण अपनी योजनाओं को क्रियान्वित नहीं कर सके थे. लेकिन इस साल, धान उत्पादक तहसीलों में बारिश अच्छी रही है. इसलिए, वे समय पर पौधे फिर से लगा सकते हैं.

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इंद्रायणी चावल की किल्लत नहीं होगी

पुणे राज्य में धान उगाने वाले प्रमुख जिलों में से एक है. पिछले कुछ वर्षों से जिले में किसान इंद्रायणी सहित कई किस्मों की खेती कर रहे हैं. लेकिन राज्य में इंद्रायणी चावल की किस्म से की खेती करने वाला पुणे एक प्रमुख जिला है, क्योंकि यह एक देशी किस्म है. खास बात यह है कि अपने अनूठे स्वाद और सुगंध के कारण घरेलू और थोक बाजारों में इसकी भारी मांग है. वहीं, इस साल अधिक बुवाई के चलते बाजार में पूरे साल इंद्रायणी चावल की किल्लत नहीं होगी. कचोले ने कहा कि खरीदारों के लिए यह अच्छी खबर है.

बड़े स्तर पर होती है धान की खेती

कृषि कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोंकण क्षेत्र के अलावा पुणे जिले में धान की बड़े स्तर पर खेती होती है. हालांकि, पारंपरिक रूप से मावल और मुलशी तहसीलें धान की उच्च गुणवत्ता वाली अंबेमोहर किस्मों की खेती के लिए जानी जाती हैं. लेकिन अब, अधिकांश किसान बाजार में अधिक कीमत और ज्याद मांग की वजह से इंद्रायणी किस्म की ओर रुख कर रहे हैं. यह धान उत्पादकों के लिए एक वरदान है. ऐसे में कृषि अधिकारियों को लगता है कि इस मौसम में धान का उत्पादन बढ़ेगा. हालांकि, मॉनसून का मौसम अभी खत्म नहीं हुआ है. बड़ी बात यह है कि फसल में कोई बड़ी बीमारी भी दर्ज नहीं की है. इन पहलुओं को देखते हुए, अधिकारियों को लगता है कि इस साल उत्पादन में वृद्धि होगी. 

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