प्याज खरीदी का डेटा सार्वजनिक करने की मांग (फाइल फोटो)महाराष्ट्र में प्याज किसानों ने सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने कहा है कि नाफेड और एनसीसीएफ जो प्याज खरीद रहे हैं, उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि किसानों को यह पता चल सके कि आखिर किस स्तर पर और कितनी मात्रा में खरीद हो रही है. संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने मांग की है कि नाफेड रोजाना यह जानकारी जारी करे कि किन मंडियों से कितनी प्याज खरीदी गई, किन किसानों से खरीद हुई और कुल कितनी मात्रा का उठाव किया गया. उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता आने से किसानों के बीच बनी शंकाएं दूर होंगी और सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होगी.
किसान संगठन ने मांग रखते हुए कहा कि यह भी साफ किया जाना चाहिए कि खरीद अभियान वास्तव में सभी प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों में चल रहा है या इसका लाभ केवल सीमित क्षेत्रों तक ही पहुंच रहा है. किसानों का आरोप है कि कई इलाकों में उत्पादकों को सरकारी खरीद का अपेक्षित फायदा नहीं मिल पा रहा है.
संगठन ने कहा कि पिछले कई महीनों के दौरान बड़ी संख्या में किसानों को अपनी प्याज उत्पादन लागत से भी कम कीमत पर बेचनी पड़ी. ऐसे किसानों को मौजूदा सरकारी खरीद दर के आधार पर राहत या मुआवजा दिया जाना चाहिए. किसानों का तर्क है कि जब बाजार में कीमतें बेहद कमजोर थीं, तब उन्हें पर्याप्त सहारा नहीं मिला.
किसान संगठन ने एनसीसीएफ की गतिविधियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. भारत दिघोले ने कहा कि यह बताया जाए कि एजेंसी ने जमीनी स्तर पर खरीद शुरू की है या नहीं और अब तक कितनी मात्रा में खरीद की गई है. इससे किसानों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी.
प्याज उत्पादकों ने मांग की है कि नाफेड और एनसीसीएफ रोजाना ऑनलाइन खरीद संबंधी आंकड़े जारी करें. इसमें मंडीवार खरीदी गई मात्रा, लाभान्वित किसानों की संख्या और खरीद दर जैसी जानकारी शामिल होनी चाहिए. संगठन ने कहा कि इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी.
किसानों ने यह भी कहा कि हर साल प्याज उत्पादकों को मूल्य अस्थिरता का सामना करना पड़ता है. निर्यात प्रतिबंध, शुल्क और अन्य नीतिगत फैसलों का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है. इसलिए सरकार को ऐसा स्थायी तंत्र विकसित करना चाहिए जो किसानों को कीमतों में भारी गिरावट से सुरक्षा दे सके.
संगठन ने मुख्यमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री की संयुक्त बैठक बुलाने की मांग की है. साथ ही लंबे समय से लंबित प्याज निगम के गठन का मुद्दा भी दोहराया गया है. किसानों का मानना है कि खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण और निर्यात का समन्वित प्रबंधन करने के लिए एक समर्पित संस्था की जरूरत है.
प्याज उत्पादक संघ ने कहा कि किसानों को पारदर्शिता, न्याय और आर्थिक राहत मिलनी चाहिए. अगर लगातार नुकसान झेल रहे किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो राज्यभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है. इससे आने वाले दिनों में प्याज उत्पादकों और सरकार के बीच टकराव बढ़ने की संभावना बन सकती है. (पीटीआई)
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