लातूर में कम बारिश से खरीफ फसलों पर संकट (AI Image)महाराष्ट्र के लातूर में कम बारिश के चलते जिले को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग तेज हो गई है. लातूर ग्रामीण से BJP विधायक रमेश कराड ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर जिले के साथ-साथ मराठवाड़ा के प्रभावित इलाकों में तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की है. उन्होंने सरकार से किसानों के लिए राहत पैकेज और फसल नुकसान का तत्काल आकलन कराने की भी अपील की है. विधायक रमेश कराड ने कहा कि लंबे समय से जरूरत जितनी बारिश नहीं होने के कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें सोयाबीन और गन्ना गंभीर संकट में हैं.
उन्होने कहा कि किसानों ने बीज, खाद, कीटनाशक, खेती की तैयारी और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च की है, लेकिन अब बारिश की कमी के कारण पूरी लागत डूबने का खतरा पैदा हो गया है. उन्होंने सरकार से प्रभावित इलाकों में फसलों की स्थिति का तत्काल सर्वे कराने और नुकसान के आधार पर किसानों को राहत देने की मांग की है.
बीजेपी विधायक ने कहा कि मौजूदा स्थिति अब केवल खेती के नुकसान का मामला नहीं रह गई है. नदियों, नालों, तालाबों और कुओं में पानी तेजी से घट रहा है. भूजल स्तर में गिरावट से आने वाले हफ्तों में पेयजल संकट और गंभीर होने की आशंका है. इसका असर लोगों के साथ-साथ पशुधन पर भी पड़ सकता है, क्योंकि चारे और पानी दोनों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है. खरीफ की फसल ग्रामीण परिवारों की आय का बड़ा आधार होती है.
कराड ने कहा कि इसी आय से किसान कर्ज चुकाने, घर का खर्च चलाने और अगली फसल की तैयारी का इंतजाम करते हैं. ऐसे में फसल खराब होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है. रमेश कराड ने लातूर ग्रामीण के साथ मराठवाड़ा के अन्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी सरकार से स्थिति की समीक्षा करने को कहा है. उन्होंने फसल नुकसान, पानी और पशु चारे की उपलब्धता का जायजा लेकर जल्द राहत उपाय घोषित करने की मांग की.
लातूर के पूर्व विधायक और BJP नेता शिवाजीराव पाटिल कव्हेकर ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लातूर और मराठवाड़ा में सूखा घोषित करने की मांग की है. उन्होंने किसानों के लिए ठोस वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत बताई है.
कव्हेकर ने कहा कि बारिश में देरी और पर्याप्त वर्षा नहीं होने से सोयाबीन के अलावा तूर, मूंग, उड़द और ज्वार की फसलें भी प्रभावित हुई हैं. कई इलाकों में फसलों की बढ़वार रुक गई है और किसानों की खेती पर लगी पूरी पूंजी खतरे में है.
पूर्व विधायक कव्हेकर ने 2025 की खरीफ फसल के लंबित बीमा मुआवजे का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने दावा किया कि लातूर जिले के 60 राजस्व मंडलों के किसानों को मई 2026 के बाद भी फसल बीमा की राशि नहीं मिली है.
उन्होंने राज्य सरकार से बीमा कंपनियों के साथ बातचीत कर अटके हुए दावों का निपटारा कराने और मुआवजे की रकम जल्द से जल्द किसानों के बैंक खातों में जमा कराने की मांग की है.
कव्हेकर ने लातूर शहर में पेयजल की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है. उन्होंने पानी की सप्लाई से जुड़े अधूरे बुनियादी ढांचे के काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की मांग की है, ताकि शहर को नियमित पानी मिल सके. पूर्व विधायक ने उजनी बांध से मांजरा बांध तक पानी लाने की परियोजना का भी जिक्र किया. करीब 22 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत विलासराव देशमुख ने इस परियोजना का उद्घाटन किया था, लेकिन यह अब तक पूरी नहीं हो सकी है.
कव्हेकर ने बताया कि लातूर शहर की जलापूर्ति के लिए धनेगांव बांध से करीब 65 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की एक अन्य परियोजना पर काम चल रहा है. उन्होंने इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की जरूरत बताई, ताकि शहर में पर्याप्त और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके. लातूर शहर में पानी के बेहतर प्रबंधन के लिए कव्हेकर ने घरेलू जल कनेक्शनों पर मीटर लगाने की मांग भी की है. उनका कहना है कि इससे पानी की बर्बादी पर नियंत्रण रखने और उपलब्ध सीमित जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है.
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