Paddy Scam: धूप में सूख गया MSP का धान! छत्तीसगढ़ के खरीद केंद्रों से 19 करोड़ का स्टॉक 'गायब'

Paddy Scam: धूप में सूख गया MSP का धान! छत्तीसगढ़ के खरीद केंद्रों से 19 करोड़ का स्टॉक 'गायब'

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी धान खरीद केंद्रों से 81,621 क्विंटल धान गायब पाया गया है, जिसकी कीमत लगभग 19 करोड़ रुपये बताई जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि धान धूप में रखे रहने के कारण सूख गया और वजन कम हो गया. मामले के खुलासे के बाद कुछ खरीद केंद्रों के इंचार्ज को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं.

Advertisement
Paddy Scam: धूप में सूख गया MSP का धान! छत्तीसगढ़ के खरीद केंद्रों से 19 करोड़ का स्टॉक 'गायब'छत्तीसगढ़ में धान घोटाले का नया मामला आया सामने

छत्तीसगढ़ में धान गायब होने के कई मामले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं. एक बार फिर छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले में, सरकारी धान खरीद केंद्रों से 19 करोड़ रुपये का 81,621 क्विंटल धान गायब हुआ है. इस गड़बड़ी का कारण यह बताया गया है कि धान धूप में रखे रहने के कारण सूख गया, जिससे उसका वजन कम हो गया. आपको बता दें हर साल, छत्तीसगढ़ सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदती है. खरीदा गया धान खरीद केंद्रों पर लाया जाता है और बाद में कस्टम मिलिंग के लिए चावल मिल मालिकों को दिया जाता है.

जिले में पांच खरीद केंद्र बनाए गए

महासमुंद जिले में ऐसे पांच खरीद केंद्र, महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली है. पूरे जिले से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान सुरक्षित भंडारण के लिए इन केंद्रों पर लाया जाता है. इन पांच केंद्रों पर खरीद केंद्रों से कुल 22,88,875 क्विंटल धान लाया गया था. हालांकि, बाद में फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान कमी पाई गई, महासमुंद केंद्र में 25,780 क्विंटल, बागबाहरा में 18,395 क्विंटल, पिथौरा में 6,828 क्विंटल, बसना में 13,488 क्विंटल और सरायपाली में 17,188 क्विंटल. कुल मिलाकर, सभी पांच केंद्रों से 81,621 क्विंटल धान गायब पाया गया. खरीफ मार्केटिंग वर्ष 2024-25 के लिए, धान का MSP 3100 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था. इस दर से, गायब हुए 81,621 क्विंटल धान की कीमत लगभग 19 करोड़ रुपये है. इस कमी का कारण धूप में सूखने से वजन कम होना बताया गया है.

ऑनलाइन रिकॉर्ड में धान को सूखा दिखाया गया

आशुतोष कोसारी (जिला मार्केटिंग अधिकारी, महासमुंद) ने बताया कि खरीफ मार्केटिंग वर्ष 2024-25 के दौरान महासमुंद जिले में पांच धान खरीदी केंद्र चालू थे, महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली. 81,621 क्विंटल धान ऑनलाइन रिकॉर्ड में सूखा हुआ दिखाया गया है, जिसे कमी के तौर पर दिखाया जा रहा है. इन केंद्रों पर धान की खरीदी पिछले साल दिसंबर में शुरू हुई थी, और यह प्रक्रिया अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पूरी हो गई थी. वजन में कमी का कारण यह है कि धान को खरीदी केंद्रों पर लंबे समय तक खुले में रखा गया था, जिससे धूप और मौसम की वजह से वह सूख गया और उसका वजन कम हो गया.

19 करोड़ रुपये का धान गायब

महासमुंद ज़िले में 19 करोड़ रुपये का 81,621 क्विंटल धान गायब हो गया है. 2024-25 के धान खरीद सीज़न के दौरान, महासमुंद ज़िले के पाँच खरीद केंद्रों पर 22,88,875 क्विंटल धान लाया गया था. लेकिन, फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान, लगभग 19 करोड़ रुपये के 81,621 क्विंटल धान की कमी पाई गई. हम अभी महासमुंद ज़िले के तुमडाबरी धान खरीद केंद्र पर हैं, जहाँ 8 करोड़ रुपये का धान भी गायब है. ज़िम्मेदार अधिकारी इस कमी का कारण धूप में सूखने से वज़न कम होना बता रहे हैं, लेकिन सूखने से 19 करोड़ रुपये के धान का नुकसान होना अविश्वसनीय है. इस मामले के सामने आने के बाद, कुछ खरीद केंद्र इंचार्ज को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. (अरविंद यादव का इनपुट)

ये भी पढ़ें: 

बिहार में बड़ा फैसला: कृषि विभाग में 694 पदों पर बहाली को मंजूरी, डेयरी में भी आएंगी नौकरियां
Iran Crisis: ईरान में लगी है आग, भारत में चाय निर्यातक परेशान, जानें टेंशन की असली वजह

POST A COMMENT