
नीलगिरी के कई उगाने वाले इलाकों में पाले की वजह से कुन्नूर टी ऑक्शन में चाय की आवक पर असर पड़ रहा है. इससे यहां पर ऑफर की गई मात्रा में कमी देखी जा रही है. ट्रेडर्स की मानें तो मौसम की वजह से ऑफर में 20 परसेंट की गिरावट आई है. इससे चाय के उत्पादन पर असर पड़ सकता है. ट्रेडर्स को इस बात की भी चिंता है कि ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक संकट भी शिपिंग शेड्यूल पर और असर डाल सकते हैं. ईरान, दक्षिण भारतीय पारंपरिक चाय की पत्तियों का एक बड़ा खरीदार है.
ग्लोबल टी ऑक्शनियर्स ने कहा कि पत्तियों में ऑफर की गई मात्रा 14,97,770 किलोग्राम थी जिससे 86 प्रतिशत बिक्री दर्ज हुई है. जबकि डस्ट ग्रेड के लिए यह आंकड़ा 3,79,143 किलोग्राम था और 86 प्रतिशत बिक्री हुई. महंगी चाय और बेहतर किस्म की चाय मुश्किल से स्थिर थी या कभी-कभी तीन रुपये से चार रुपये तक कम हुई. बेहतर मीडियम किस्म की चाय मुश्किल से स्थिर थी या कभी-कभी 1 रुपये से 2 रुपये तक कम हुई खासकर बोल्डर ग्रेड पर कुछ कमी हुई. प्राइमरी होल लीफ ग्रेड्स लगातार 2 रुपये से 3 रुपये तक महंगे रहे. कभी-कभी कुछ लॉट 2 रुपये से 3 रुपये तक कम बिके और ठीक-ठाक बिक्री भी हुई.
पिछले दिनों खबर आई थी कि दक्षिण के मुन्नार और तमिलनाडु के नीलगिरी को खुशबूदार चाय बागान इन दिनों कड़ाके की सर्दी का सामना कर रहे हैं. इन दोनों ही जगहों पर गिरते तापमान का असर बागानों पर नजर आने लगा है. इसकी वजह से पिछले कुछ दिनों में उत्पादन प्रभावित हुआ है. इस क्षेत्र की एक चाय प्रोडक्शन कंपनी के सूत्रों ने बताया कि अकेले मुन्नार क्षेत्र में तापमान गिरने से करीब 100 हेक्टेयर फसल का नुकसान हुआ है. इससे तीन महीने के प्रोडक्शन पर असर पड़ने की संभावना है.
ज्यादा ठंड से चाय की झाड़ियों को बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है और पत्तियां झड़ रही हैं. अकेले लॉकहार्ट एस्टेट में करीब 49.04 हेक्टेयर (एस्टेट के कुल एरिया का लगभग 14.3 प्रतिशत) प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा कि फसल का नुकसान होने की उम्मीद है और रिकवरी बेहतर मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी. इसमें गर्म तापमान, ज्यादा नमी और बारिश शामिल है. उन्होंने दो घटनाओं - साइबेरियन हाई और कैटाबेटिक फ्लो - का जिक्र किया. दक्षिण भारत के ऊंचे इलाकों में चाय उगाने वाले क्षेत्रों में बहुत कम तापमान के कारण ये स्थितियां पैदा हो रही हैं.
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