ग्रामीण महिलाओं को मिली आर्थिक मजबूतीयूपी में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए योगी सरकार का प्रयास जारी है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन, ग्राम्य विकास विभाग द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है. दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों एवं सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें सतत आजीविका से जोड़ा जा रहा है. वहीं आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को कृषि एवं गैर-कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ते हुए ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य पर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है. विभिन्न विभागीय योजनाओं के समन्वय से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं.
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में दुग्ध वैल्यू चेन के अंतर्गत गठित मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनियों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है. बुंदेलखंड क्षेत्र में संचालित बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी इस दिशा में एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है. बलिनी ने न केवल महिलाओं को दुग्ध उत्पादन एवं विपणन से जोड़ा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर आधी आबादी के स्वावलम्बन की मिसाल कायम की है.
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी की स्थापना वर्ष 2019 में जनपद झांसी में की गई थी. कम्पनी का मुख्य उद्देश्य महिला दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा करना, पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से दुग्ध संग्रहण, समयबद्ध भुगतान, क्षमता निर्माण एवं पशुधन सहायता सेवाएं उपलब्ध कराना है.
इसके तहत पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था, कृत्रिम गर्भाधान तथा गुणवत्तायुक्त पशु आहार जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं.बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी द्वारा दुग्ध संग्रहण से लेकर भंडारण तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया में बिचौलियों को समाप्त किया गया है, जिससे किसानों एवं महिला दुग्ध उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है.
वर्तमान में बुंदेलखंड के सातों जनपदों के 1351 ग्रामों से लगभग 90 हजार महिलाओं द्वारा प्रतिदिन 2.72 लाख लीटर से अधिक दुग्ध का संग्रह किया जा रहा है, जिसमें से लगभग 20 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं. प्रदेश में दुग्ध वैल्यू चेन के अंतर्गत बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ एवं सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनियों द्वारा 31 जनपदों के 5205 ग्रामों के 2.89 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों से प्रतिदिन 9.15 लाख लीटर से अधिक दुग्ध का संग्रह किया जा रहा है. इन कम्पनियों के माध्यम से अब तक 45,611 से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में आ चुकी हैं.
ग्रामीण महिलाओं की यह सामूहिक पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि प्रदेश में समावेशी विकास एवं महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को भी साकार कर रही है.
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