पशुपालकों को सस्ती दर पर उपलब्ध होंगी दवाएं भारत दूध उत्पादन में नंबर वन है. बफैलो मीट उत्पादन में भी नंबर वन है. बीते साल दूध का 25 करोड़ टन तो बफैलो मीट का 46 लाख टन उत्पादन हुआ था. हालांकि दूध उत्पादन को देखते हुए एक्सपोर्ट का आंकड़ा बहुत पीछे है. जबकि मीट का आंकड़ा नहीं बढ़ने से पूरे संसाधनों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो अगर डिमांड बढ़ जाए तो एक्सपोर्ट का आंकड़ा और बड़ा हो सकता है. देश में दूध और मीट उत्पादन बढ़ाने के लिए संसाधन बहुत हैं. लेकिन पशुओं की जानलेवा बीमारी खुरपका-मुंहपका (FMD) इसके सामने दीवार बन खड़ी हो गई है.
हालांकि डेयरी प्रोडक्ट और बोवाइन मीट एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए देश में हर संभव कोशिश चल रही है. डिजीज फ्री जोन बनाए जा रहे हैं. खासतौर पर एफएमडी बीमारी को भी कंट्रोल करने के लिए जोन बनाए जा रहे हैं. केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और नौ राज्यों की एक खास टीम एफएमडी फ्री बनाने की कोशिश में लगी हुई है.
पशुपालन को एफएमडी फ्री राज्य या जोन बनाने के लिए पहले खुद घोषित करना होता है कि ये राज्य या इलाका एफएमडी फ्री हो चुका है. इसकी सूचना WOAH को भी दी जाती है. इस सूचना के बाद तथ्यों की जांच की जाती है कि क्या वाकई एफएमडी फ्री बनाने में गाइड लाइन का पालन किया गया है या नहीं. खासतौर से कुछ बिन्दुओं पर जांच की जाती है. जैसे,
केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मुताबिक सीरो-सर्विलांस के आधार पर कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात को एफएमडी फ्री जोन बनाने की तैयारी चल रही है. इसी के चलते एनीमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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