इस चारे को गाय, भैंस, बकरी सहित सभी पशुओं को खिला सकते हैं. बाजार में एनिमल प्रोडक्ट, दूध, घी, अंडा-चिकन, मीट की डिमांड बढ़ रही है. प्रोटीन की जरूरत को पूरा करने के लिए भी लोग अब एनिमल प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब डिमांड बढ़ रही है तो उत्पादन भी बढ़ाना पड़ेगा. अच्छे और ज्यादा उत्पादन के लिए जरूरी है कि गाय-भैंस हो या मुर्गे-मुर्गी उन्हें अच्छे फीड और फोडर की जरूरत होती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो खुराक जितनी पौष्टि क होगी तो उत्पान भी उतना ज्यादा बढ़ेगा. इसीलिए अजोला (चारा) खूब खिलाया जा रहा है. लेकिन इसे खिलाने का भी एक तरीका है. अगर पशु-पक्षियों को अजोला एक्सपर्ट के मुताबिक खिलाया तो ये एनिमल प्रोडक्शन बढ़ाने में बहुत मददगार साबित होगा.
सरकारी आंकड़ों पर जाएं तो दूध-मीट की बढ़ती डिमांड के बीच वनों और चारागाहों का क्षेत्रफल घटता जा रहा है. ऐसी फसल के उत्पादन में भी कमी आ रही है जिनका इस्तेमाल पशु आहार के रूप में होता है. इसी के चलते अब ज्यादा उपज और छोटी नस्ल वाली फसल को बढ़ावा दिया जा रहा है. हरा चारा अजोला उसमे से एक है.
हरा चारा अजोला पानी की सतह पर होता है. जरूरी नहीं कि अजोला तालाब में हो, पानी की टंकी में भी इसका उत्पादन किया जा सकता है. चारा एक्सपर्ट की मानें तो अजोला में बड़ी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. इसके अलावा प्रोटीन, जरूरी एमिनो अम्ल, विटामिन (विटामिन ए, विटामिन बी 12 और बीटा केरोटिन), बढ़वार के लिए जरूरी कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटाश, लोहा, तांबा, मैग्निशियम भी बड़ी मात्रा में पाये जाते हैं. अजोला में 25-30 फीसद प्रोटीन, 10-15 फीसद खनिज, 7-10 फीसद एमिनो अम्ल, जैव सक्रिय पदार्थ और जैव पोलिमर्स आदि पाये जाते हैं. अजोला में कार्बोहाइड्रेट और नमी की मात्रा बहुत कम होती है. इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा और लिग्निन की मात्रा कम होती है.
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