Goat Feeding in Monsoon: क्यों जरूरी है इस मौसम में खुले मैदान, जंगल में चरने जा रहीं भेड़-बकरियों पर नजर रखना 

Goat Feeding in Monsoon: क्यों जरूरी है इस मौसम में खुले मैदान, जंगल में चरने जा रहीं भेड़-बकरियों पर नजर रखना 

Goat Feeding in Monsoon बरसात का मौसम शुरू होते ही भेड़-बकरियों को कई तरह के टीके लगवाने की सलाह दी जाती है. क्योंकि इस दौरान एंटरोटॉक्सिमिया नाम का बैक्टीरिया बहुत एक्टिगव रहता है. इसे फड़किया बीमारी के नाम से भी जाना जाता है. अगर टीका नहीं लगवाया है तो कुछ ही दिन में पशुओं की मौत हो जाती है. अभी इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है. 

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Goat Feeding in Monsoon: क्यों जरूरी है इस मौसम में खुले मैदान, जंगल में चरने जा रहीं भेड़-बकरियों पर नजर रखना भेड़-बकरियों में तेजी से फैलती है पीपीआर और शीप पॉक्स बीमारी.

Goat Feeding in Monsoon बरसात का मौसम है. कई राज्य और शहरों में तो लगातार बारिश हो रही है. कई जगह तो बाढ़ भी आई हुई है. ऐसे में एक सबसे बड़ी परेशानी होती है कि पशुओं को क्या खि‍लाएं. कुछ लोग इस इंतजार में रहते हैं कि कब बादल खुले और फिर भेड़-बकरियों को बाहर चरने के लिए भेजें. हालांकि इसके पीछे कुछ मजबूरी भी होती है और कुछ जागरुकता की कमी. क्योंकि गोट एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसे वक्त में भेड़-बकरियों को बाहर खुले मैदान और जंगल में चरने के लिए भेजना बहुत जानलेवा साबित होता है. 

इसके चलते भेड़-बकरियों को गंभीर बीमारी हो सकती है. ओवर ईटिंग यानि ज्यादा और गीला हरा चारा खाने के चलते बीमारी होती है. इसलिए बाहर जाने वाली भेड़-बकरियों नजर रखना बहुत जरूरी हो जाता है. क्योंकि इस मौसम में हरे चारे पर कीड़े भी पनपते हैं. 

भेड़-बकरियों में कैसे आता है ये बैक्टीरिया

एनिमल एक्सपर्ट इकबाल ने किसान तक को बताया कि यह वो मौसम होता है जब खेतों में फसल कट चुकी होती है और खेत खाली पड़े होते हैं. ऐसे में भेड़ों के झुंड खेतों में चरने के लिए चले जाते हैं. वहां यह खेत में जमीन पर पड़े हुए अनाज को खाती हैं. एक तो इन्हें अनाज खाने को मिलता है दूसरे मौसम भी ऐसा है तो यह ज्यादा खा जाती हैं. ज्यादा खाने के चलते ही इनकी आंतों में एंटरोटॉक्सिमिया नाम का बैक्टीमरिया पनपने लगता है. इसी के चलते ही भेड़ों को दस्त लगते हैं. दो साल पहले भी इसी बैक्टीरिया के चलते भेड़ों की मौत हुई थी. 

फड़किया बीमारी के लक्षण क्या हैं   

फड़किया बीमारी की बात करें तो पहले भेड़-बकरी को दस्त होते हैं. फिर एक दम से दस्त बंद हो जाते हैं. लेकिन दो ही दिन बाद अचानक से भेड़-बकरी में जरूरत से ज्यादा कमजोरी आ जाती है. वो ठीक से चल भी नहीं पाती हैं. चलने की कोशिश करती हैं तो लड़खड़ा कर गिर जाती हैं. फिर से उसे एक-दो दस्त आते हैं. लेकिन इस बार दस्त के साथ थोड़ा सा खून भी आने लगता है. इसके बाद उस पशु की मौत हो जाती है. और यह सब होता है पशु की आंत में अचानक से पनप उठे एक बैक्टीरिया के कारण.

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