उत्तर प्रदेश के पशुधन-दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने की बैठकउत्तर प्रदेश के दुग्ध एवं पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने 30 अगस्त तक मण्डलावार समीक्षा बैठक की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश में अधिक से अधिक दुग्ध समितियों का गठन किया जाए. प्रत्येक गांव में एक दुग्ध समिति गठित करने की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को दुग्ध समितियों से जोड़ा जा सके और उन्हें उनके दुग्ध उत्पादन का बेहतर लाभ मिल सके. वहीं, पराग के उत्पादों की मार्केटिंग पर विशेष फोकस किया जाए. मंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव और बिचौलियों के पात्र लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए.
मंत्री ने बताया कि दुग्ध उत्पादन में विगत वर्षों से पूंजी निवेश एवं उत्तम तकनीकी के समावेश पर विशेष जोर दिया जा रहा है. जिसके फलस्वरूप उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन में लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है. इसके साथ ही प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को दुग्ध सहकारिता के माध्यम से उनके दूध का वाजिब मूल्य भी दिलाया जा रहा है. वहीं,शहरी उपभोक्ताओ को गुणवत्तापूर्ण दूध भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
दुग्ध एवं पशुधन विकास मंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जनपदों में पशुचिकित्साधिकारी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, हरे चारे एवं भूसे की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, एफएमडी टीकाकरण, गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, कृत्रिम गर्भाधान तथा दुग्ध समितियों के गठन सहित सभी प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों की नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए.
संचारी रोगों से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान की समीक्षा के दौरान दुग्ध एवं पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि 30 अगस्त तक टीकाकरण का कार्य कम से कम 70 प्रतिशत पूरा कर लिया जाए. टीकाकरण अभियान की नियमित निगरानी की जाए और लक्षित पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए. वहीं, बाढ़ प्रभावित जनपदों में पशुओं के लिए चारा, भूसा, औषधि, पेयजल सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
बाढ़ की स्थिति में पशुपालकों और गोवंश को किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए संबंधित विभागीय अधिकारी स्थानीय स्तर पर समन्वय बनाकर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें. जबकि अतिसंवेदनशील एवं संवेदनशील जनपदों में विशेष सतर्कता बरतने तथा परिस्थितियों की लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए है.
प्रदेश में गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा जुलाई 2026 में किए गए स्थलीय निरीक्षण में चिन्हित समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए गए हैं. निरीक्षण में जलभराव एवं कीचड़, खड़ंजा एवं पंडना, हरा चारा एवं पशु आहार, शेड एवं बाउंड्रीवाल तथा अभिलेखीकरण एवं टैगिंग से संबंधित समस्याएं सामने आईं.
इन समस्याओं से प्रभावित जनपदों में गोंडा, बहराइच, मुरादाबाद, अमरोहा, वाराणसी, जालौन, संत कबीर नगर, उन्नाव, अयोध्या, गोरखपुर, रामपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, जौनपुर, बलिया, ललितपुर, देवरिया, कानपुर देहात, मथुरा, महोबा, बुलंदशहर, बागपत, मेरठ, चंदौली, बाराबंकी, आजमगढ़, अमेठी, बरेली, सहारनपुर एवं मऊ शामिल हैं. संबंधित अधिकारियों को चिन्हित कमियों का प्राथमिकता से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
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