Animal Disease: गर्मी में भी पशुओं के बाड़े से दूर रहेंगी बीमारियां, करने होंगे ये खास काम 

Animal Disease: गर्मी में भी पशुओं के बाड़े से दूर रहेंगी बीमारियां, करने होंगे ये खास काम 

Animal Disease कोरोना के बाद से डेयरी फार्म के रखरखाव के तरीके बदल गए हैं. अब सवाल सिर्फ पशुओं को होने वाली बीमारी का ही नहीं है, बल्कि इंसानों को होने वाली बीमारियां भी पशुओं से जुड़ी हुई हैं. पशुओं से इंसानों को और इंसानों से पशुओं को होने वाली बीमारियों को जूनोटिक कहा जाता है. इन्हीं बीमारियों की रोकथाम के लिए नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) चलाया जा रहा है. 

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पशुओं की बहुत सारी ऐसी बीमारियां हैं जो मौसम के हिसाब से होती हैं. अप्रैल से ही ही गर्मी का एहसास शुरू हो जाता है. अब तो मई को भी 6 दिन बीत चुके हैं. हाल ही में तापमान 40 और 42 डिग्री को भी पार कर गया था. लेकिन बीच-बीच में हुइ्र हल्की बारिश ने मौसम को बदल दिया. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो यही वो वक्त होता है जब मौसम के हिसाब से बीमारियां पशुओं के बाड़े में दस्तक देती हैं. ये बीमारियां पशुओं को परेशान तो करती ही हैं, साथ में उत्पादन पर भी असर डालती हैं. इलाज पर होने वाले खर्च से लागत बढ़ जाती है. 

इसलिए जरूरी है कि बदलते मौसम के चलते पशुओं के बाड़े में बदलाव किए जाएं. हालांकि इसे देखते हुए पशुओं को जूनोसिस या जूनोटिक बीमारियों से बचाने के लिए नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) चलाया जा रहा है. मिशन के तहत जहां बायो सिक्योरिटी का इस्तेमाल करने से जुड़े टिप्स पशुपालकों को दिए जाते हैं. साथ ही ये सलाह दी जाती है कि पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए साइंटीफिक तरीके से पशु पालन किया जाए. 

बीमारियों से बचाने के टिप्स 

पशुपालन मंत्रालय से जुड़े जानकारों की मानें तो वन हैल्थ मिशन के तहत एनीमल फार्म पर बॉयो सिक्योरिटी बहुत जरूरी है. कोरोना जैसी बीमारी फैलने के बाद से तो इसकी जरूरत और ज्यादा महसूस की जाने लगी है.  

  • सबसे पहले अपने एनीमल फार्म की बाड़बंदी कराएं. 
  • बाड़बंदी होने से सड़क पर घूमने वाला जानवर फार्म में नहीं घुसेगा. 
  • फार्म के अंदर और बाहर दवा का छिड़काव कराएं. 
  • हैंड सेनेटाइज में काम आने वाली दवा फार्म पर रखें.
  • फार्म में बाहर से आने वाले व्यक्ति के जूते बाहर ही उतरवाएं.
  • जूते फार्म के बाहर उतरवा नहीं सकते तो उन्हें सेनेटाइज करें. 
  • आने वाले के हाथ और कपड़ों को भी सेनेटाइज करवाएं. 
  • पीपीई किट पहनाकर ही फार्म के अंदर ले जाएं. 
  • फार्म पर नए आने वाले पशु को कम से कम 15 दिन अलग रखें. 
  • छोटे बच्चे, बीमार, गर्भवती, हेल्दी और दूध देने वाले पशुओं को अलग रखें. 
  • बदलते मौसम के हिसाब से बाड़े में पशुओं का रखरखाव रखें. 
  • बरसात के मौसम में पशुओं को खासतौर पर मच्छर-मक्खियों के प्रकोप से बचाएं.

 निष्कर्ष-

एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो साइंटीफिक तरीके से किया गया पशुपालन पशुओं के साथ-साथ इंसानों को भी पशुओं की बीमारी से सुरक्षित रखता है. क्योंकि इंसानों में होने वाली करीब 70 फीसद बीमारियां पशुओं से होती हैं. इन्हें जूनोसिस या जूनोटिक भी कहा जाता है.  

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