Milk Production: दूध-मीट की लागत को कम कर देगा ये खास चारा, पढ़ें डिटेल 

Milk Production: दूध-मीट की लागत को कम कर देगा ये खास चारा, पढ़ें डिटेल 

Milk Production ज्यादा दूध के लिए अच्छी खुराक तो पशुओं को खि‍लानी ही होगी, लेकिन, जरूरी ये है कि ऐसा चारा तैयार किया जाए जिससे प्रति किलोग्राम चारे में दूध का उत्पादन बढ़े. वहीं हमारे यहां आठ करोड़ लोग आजीविका चलाने के लिए डेयरी और पशुपालन से जुड़े हैं.

Advertisement
Milk Production: दूध-मीट की लागत को कम कर देगा ये खास चारा, पढ़ें डिटेल 14 मई को आगरा में होगा दुग्ध समागम

महंगा होता हरा चारा हो या फिर चारे की कमी, दूध-मीट समेत सभी एनिमल प्रोडक्ट की लागत बढ़ रही है. खासतौर से दूध की लागत बहुत बढ़ती जा रही है. जबकि दूध का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. 4.5 से लेकर पांच फीसद की दर से हर साल उत्पादन बढ़ रहा है. विश्व के कुल दूध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 25 फीसद है. साल 2047 तक ये आंकड़ा डबल से भी ज्यादा होने की उम्मीद है. लेकिन, आज भी पशुपालकों को दूध की सही कीमत नहीं मिल पा रही है. 

पशुपालन में दूध पर आने वाली लागत का 70 फीसद खर्च आज भी चारे पर होता है. उस खर्च पर कंट्रोल करना पशुपालक के हाथ में है नहीं. इसी को देखते हुए एक ऐसे चारे की तलाश पर काम चल रहा है जो लागत को कम कर सके. जानकारों की मानें तो ये खास चारा मात्रा में कम खाने को दिया जाएगा, लेकिन इससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. 

दूध उत्पादन संग खपत बढ़ना जरूरी 

डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि मौजूदा वक्त में भारत 24 करोड़ टन दूध का उत्पादन कर रहा है. और उम्मीद है कि 2047 तक देश में करीब 63 करोड़ टन दूध का उत्पादन होने लगेगा. जैसा की उम्मीद है तो ऐसा होने पर ये विश्व दूध उत्पादन का 45 फीसद हिस्सा होगा. और इतना ही नहीं 63 करोड़ टन उत्पादन होने पर 10 करोड़ टन दूध देश में सरप्लस हो जाएगा. वहीं ये भी उम्मीद है कि 2047 तक विश्व व्यापार का दो तिहाई हिस्सा भारत का होगा. लेकिन दूध उत्पादन बढ़ने के साथ ही हमे उसकी खपत और पशुपालक की लागत संग उसके मुनाफे के बारे में भी सोचना होगा. क्योंकि हर साल अच्छी दर से दूध उत्पादन बढ़ रहा है तो इसकी खपत का बढ़ना भी जरूरी है. खपत बढ़ेगी तो कीमत बढ़ेगी.

और रणनीति ये होनी चाहिए कि दूध की कीमतें खाद्य मुद्रास्फीति दर से ज्यादा न बढ़ें. वहीं पशुपालकों के बारे में इस तरफ भी सोचना होगा कि प्रति किलोग्राम चारे में दूध उत्पादन को बढ़ाया जाए. और ये सब मुमकिन होगा अच्छी ब्रीडिंग और चारे में सुधार लाकर. आज पशुपालक अपने दूध के दाम ज्यादा और चारे के दाम कम कराना चाहता है. क्योंकि अगर दूध की लागत 100 रुपये लीटर आ रही है तो उस में 70 रुपये तो सभी तरह के चारे और खुराक पर ही खर्च हो जाते हैं. 

10 फीसद इंपोर्ट से 24 फीसद बढ़ेगी डिमांड

एक्सपर्ट की मानें तो अमेरिका लगातार अपने डेयरी प्रोडक्ट के लिए दबाव बना रहा है. लेकिन भारत अपने पशुपालक की रक्षा करते हुए डेयरी प्रोडक्ट इंपोर्ट करने से मना कर चुका है. एक तो मामला ये भी है कि वहां पशुओं को मांसाहारी खुराक दी जाती है. वहीं अगर मंजूरी दे दी गई तो इससे देश के डेयरी सेक्टर में अस्थिकरता आ जाएगी. हमारे इंपोर्ट करने से होगा ये कि आज हम 24 करोड टन दूध का उत्पादन कर रहे हैं. अब अगर हमने अपने उत्पादन का 10 फीसद भी इंपोर्ट कर लिया तो वो आंकड़ा होगा 24 टन. जबकि विश्व का कुल दूध कारोबार 100 मीट्रि‍क टन है. ऐसे में हमारे इंपोर्ट करते ही ये आंकड़ा 124 मीट्रिक टन पर पहुंच जाएगा.  

ये भी पढ़ें: 

Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन

EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!

POST A COMMENT