Animal Agricultural: FPO बनाकर किया तो डेयरी-पशुपालन में खूब होगा मुनाफा, अपनाएं ये 10 टिप्स 

Animal Agricultural: FPO बनाकर किया तो डेयरी-पशुपालन में खूब होगा मुनाफा, अपनाएं ये 10 टिप्स 

Animal Agricultural पशुपालक और किसान ही नहीं, बहुत सारे युवा भी किसान उत्पादक संगठन (FPO) अपनी किस्मत आजमा सकते हैं. खास बात ये है कि डेयरी-पोल्ट्री हो या फिर मछली पालन तीनों ही सेक्टर के प्रोडक्ट की घरेलू बाजार से लेकर एक्सपोर्ट मार्केट तक में खूब डिमांड है. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनीमल साइंस यूनिवर्सिटी (गडवासु), लुधियाना एफपीओ को तकनीकी मदद दे रही है.

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Animal Agricultural: FPO बनाकर किया तो डेयरी-पशुपालन में खूब होगा मुनाफा, अपनाएं ये 10 टिप्स भेड़ पालन (सांकेतिक तस्वीर)

डेयरी-पोल्ट्री हो या फिर मछली पालन, हर एक की अपनी कुछ परेशानियां हैं. लेकिन एक परेशानी ऐसी है जो सभी की एक जैसी ही है. और वो है लागत, जैसे फीड और फोडर की. बीते कई साल से फीड और फोडर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. आरोप तो ये भी हैं कि चारे की कमी भी होने लगी है. ऐसे में जितनी लागत हो गई है उतना दूध हो या चिकन-अंडा, मछली बाजार में उसका सही दाम नहीं मिल पाता है. वहीं सरकार का मानना है कि ये तीनों ही सेक्टर संगठित ना होने के चलते पशुपालकों को कहीं ना कहीं परेशानी का सामना करना पड़ता है. 

इसीलिए सरकार डेयरी-पोल्ट्री और मछली पालन में किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाने को बढ़ावा दे रही है. डेयरी-पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर से जुड़े एक्सप र्ट की मानें तो आज किसान उत्पादक संगठन (FPO) का रोल बहुत अहम हो गया है. केन्द्र और राज्य सरकारें भी एफपीओ की खूब मदद कर रही हैं. कई पशुपालन से जुड़ी यूनिवर्सिटी भी एफपीओ को तकनीकी मदद देती हैं. 

FPO के लिए जरूरी 10 टिप्स 

मुश्काबाद एफएएम डेयरी प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के नाम से डेयरी का एफपीओ पंजाब में अच्छा काम कर रहा है. गडवासु यूनिवर्सिटी इस एफपीओ को तकनीकी मदद देती है. ये एफपीओ ब्लॉक समराला में चालू है और भारतीय कंपनी अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड है. इस एफपीओ में 100 से ज्यादा सदस्य हैं. एफपीओ भारत सरकार की मुख्य परियोजनाओं में से एक है. एफपीओ किसानों को समूहों में संगठित होने में मदद करते हैं. 

अगर पशुपालक एफपीओ बनाते हैं तो वो इसके माध्यम से अच्छीं कमाई कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि एक एफपीओ शुरू करते वक्त कुछ खास बातों का ख्यासल रखा जाए. जैसे वैज्ञानिक तरीके से डेयरी फार्मिंग की जाए. नस्ल विशेषता पर जोर दें, पशु की पहचान, पशु का रिकॉर्ड रखना, चारा संरक्षण, संतुलित आहार, आवास प्रबंधन, टीकाकरण, बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण, प्रजनन मैनेजमेंट और डेयरी वेस्ट मैनेजमेंट पर खास ध्यान देना होगा. गौरतलब रहे हाल ही में यूनिवर्सिटी ने "एफपीओ-आधारित वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग" नाम से आयोजित एक कार्यक्रम में युवाओं को एफपीओ के बारे में जानकारी दी थी.

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