Tips for Animal Care: जुलाई में करें बीमारियों से लेकर चारे तक का इंतजाम, नहीं कम होगा दूध उत्पादन Tips for Animal Care: जुलाई में करें बीमारियों से लेकर चारे तक का इंतजाम, नहीं कम होगा दूध उत्पादन
Tips for Animal Care जुलाई में सरकार की ओर से दुधारू पशुओं के लिए एडवाइजरी जारी की जाती है. बरसात के दौरान पशुओं को संक्रमित रोग होते ही उसका सबसे पहला असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. पशु गंभीर रोग से बीमार भी हो जाता है. लेकिन, अगर वक्त रहते कुछ ऐहतियाती कदम उठा लिए जाएं तो इस तरह की परेशानी और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है.
नासिर हुसैन - New Delhi,
- Jun 29, 2026,
- Updated Jun 29, 2026, 11:51 AM IST
दूध उत्पादन न घटे और पशु बीमार नहीं हो, जुलाई में हर एक पशुपालक की यही कोशिश रहती है. वजह साफ है कि जुलाई में एक खास तरह का मौसम देखने को मिलता है. ये मौसम होता है उमस वाला. इसी महीने में मौसम बदलता भी है. क्योंकि जुलाई में मॉनसून सक्रिकय हो जाता है. इसी तरह के मौसम में पशुओं को कई गंभीर बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं. और खास बात ये है कि तय प्रजनन के मुताबिक इसी महीने में भैंस बच्चा भी देती हैं.
जुलाई को ध्यान में रखकर ही पशुपालक प्लान के हिसाब से पशुओं को गाभिन कराते हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो हर महीने एडवाइजरी जारी करने के साथ ही सरकार की ओर से पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण की भी सलाह दी जाती है. पशु चिकित्सा केन्द्र पर ही नहीं पशुओं के बाड़े में जाकर भी टीकाकरण कराने की सुविधा सरकार की ओर से दी जाती है.
जुलाई में ध्यान देने वाली बातें
- जुलाई में बारिश हो रही है, इसलिए पशु परिसर को सूखा एवं साफ रखना चाहिए.
- गर्मी और नमी वाली संक्रमित बीमारियों से पशुओं को बचाना चाहिए.
- बारिश की वजह से जुलाई में परजीवी और बाहरी परजीवी का असर काफी ज्यादा होता है. ऐसे में संबंधित रोगों से बचाव करना बहुत ही जरूरी होता है.
- जुलाई में ज्यादातर पशुपालक भैंसों से बच्चा लेते हैं, इसलिए पशुपालकों को प्रजनन संबंधी सावधानी के साथ नवजात की सुरक्षा हेतु पूरी जानकारी प्राप्त होनी चाहिए. गाभिन गाय-भैंस को अलग साफ हवादार सूखा स्थान पर रखना चाहिए.
- जुलाई में अच्दे दूध उत्पादन के लिए जरूरी मात्रा में मिनरल मिक्चर की मात्रा पशु चिकित्सक की सलाह पर दिया जाना चाहिए.
- कम मात्रा में या बिल्कुल भी मिनरल मिक्चर नहीं दिए जाने से पशुओं को बीमारी हो सकती हैं.
- हरे चारे के खेतों में जानवरों को नहीं जाने दें. खासतौर से ज्वार के खेत में नहीं जाने दें.
- लम्बी गर्मी के बाद अचानक से बारिश के बाद जब हरे चारे की बढ़वार होती है उसमें साइनाइड जहर पैदा होने लगता है. इसके चलते चारा जहरीला हो जाता है. ऐसी फसल को समय पूर्व कच्ची अवस्था में न काटें और ना ही जानवरों को खिलायें.
- चारा एक्सपर्ट के मुताबिक जुलाई हरा चारा बोने के लिए सही वक्त होता है.
- हरे चारे की बीज मात्रा 25-30 किलोग्राम प्रति एकड़ इस्तेमाल करें.
- हर सीजन में पशुओं को खिलाई जाने वाली चारा घासों को जुलाई में लगाया जा सकता है.
- संतुलित पशु आहार के लिए मक्का, बाजरा, लोबिया और ज्वार की एक साथ बोआई करें. इससे आने वाले वक्त में पशुओं के लिए हरे चारे की कमी नहीं होगी.
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