
अलनीनो का असर सिर्फ खेती और इंसानों पर ही नहीं होता है. अलनीनो की चपेट दुधारू पशु भी आते हैं. इसीलिए एनिमल एक्सपर्ट पशुपालकों को अलनीनो से अलर्ट रहने की सलाह दे रहे हैं. पशुपालन मंत्रालय ने तो खासतौर पर गौशालाओं में कुछ जरूरी इंतजाम करने के लिए एडवाइजरी जारी की है. साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर वक्त रहते अलर्ट नहीं हुए तो लाखों की संख्या में गाय अलनीनो की चपेट में आ सकती हैं. अलनीनो से गायों को बचाने के लिए एडवाइजरी में 7 खास टिप्स दिए हैं.
टिप्स में गर्मी से बचाव के तरीके, चारा और पानी का मैनेजमेंट, हैल्थ, साफ-सफाई, शेड में वेंटीलेशन और प्राकृतिक हरियाली बहुत जरूरी है. गौरतलब रहे अलनीनो का सबसे ज्यादा असर तेज गर्मी, सूखा, जल संकट और चारे की कमी के रूप में ही देखने को मिलता है. कई बार ये कारण पशुओं के लिए जानलेवा भी साबित हो जाते हैं. हालांकि मौसम विज्ञान विभाग वक्त रहते अलनीनो के बारे में अलर्ट करता रहता है.
गौशाला में छाया के लिए शेड और ग्रीन नेट की व्यवस्था कर सकते हैं.
गौशाला में पंखे, कूलर या फॉगिंग सिस्टम लगवा सकते हैं.
गौशाला के फर्श पर पानी का छिड़काव करते रहें.
गौशाला में हमेशा साफ और ठंडा पानी रखें.
गौशाला में पानी के टैंक या टंकी की स्टोरेज क्षमता बढ़ा दें.
टंकी के पानी को दिन में 3-4 बार चेक करें.
हरा चारा (जैसे बरसीम, नेपियर) का स्टॉक करके रखें.
सूखे के समय के लिए साइलेज और भूसा सुरक्षित रखें.
गायों को मिनरल मिक्सचर और नमक खाने को जरूर दें.
गर्मी में होने वाली बीमारियों (हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन) पर अलर्ट रहें.
गायों की पशु चिकित्सक से नियमित रूप से जांच करवाते रहें.
गायों को खुराक संग ORS या इलेक्ट्रोलाइट्स पानी में मिलाकर दें.
गोशाला में हवा का अच्छा आवागमन रखें.
गौशाला के फर्श से गोबर और गंदगी साफ करते रहें.
गौशाला में मच्छर, मक्खी और किलनी को नियंत्रित करें.
गोशाला के आसपास नीम, पीपल आदि के पेड़ लगाए.
हरियाली होने से तापमान कम और वातावरण ठंडा रहेगा.
गौशाला में पानी और चारे का बैकअप प्लान रखें.
बिजली जाने पर वैकपिक व्यवस्था (जनरेटर आदि) रखें.
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