चीन ने जापान के समुद्री खाद्य पर लगाया प्रतिबंध. (Photo: File/Reuters) सीफूड उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. अगर इनलैंड मछली उत्पादन की बात करें तो आंकड़ा चीने को भी पीछे छोड़ने को तैयार है. मछली और दूसरे प्रोडक्ट के उत्पादन की बात करें तो आंकड़ा दो लाख टन से कुछ ही कदम दूर है. ऐसे में केन्द्र सरकार ने एक खुशखबरी साझा करते हुए जानकारी दी है कि सीफूड एक्सपोर्ट छह हजार करोड़ रुपये बढ़ गया है. सीफूड एक्सपोर्ट में ये बढ़ोतरी एक लम्बे वक्त के बाद हुई है. अभी तक सीफूड एक्सपोर्ट का आंकड़ा 62 हजार करोड़ रुपये पर था, जो अब बढ़कर 68 हजार करोड़ रुपये पर हो गया है.
आज भी अमेरिका, चीन और यूरोप हमारे बड़े खरीदार देशों में हैं. गौरतलब रहे साल 2013–14 में 30,213 करोड़ का एक्सपोर्ट हुआ था, जो बढ़कर 2024–25 में 62,408 करोड़ रुपये का हो गया था. इसमे भी एक बड़ी हिस्सेदारी झींगा एक्सपोर्ट की है. लेकिन सरकार का मकसद इस आंकड़े को एक लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का है. इसके लिए सरकार लगातार कोशिशें कर रही है. सीफूड एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक और वैल्यू एडिशन पर काम कर रही है.
हाल ही में केन्द्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली में समुद्री खाद्य निर्यातकों की एक खास बैठक की अध्यक्षता की थी. बैठक के दौरान वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई. भारत मूल्य-वर्धित समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाएगा और ईईजेड तथा खुले समुद्र से समुद्री क्षमता का पूरा इस्तेमाल करेगा. इस मौके पर उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ईईजेड और खुले समुद्र से टूना जैसी हाई वैल्यू वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं का जिक्र किया.
बेहतर ऑनबोर्ड हैंडलिंग, मजबूत कोल्ड चेन, बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन तथा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज और जरूरत पर जोर दिया. साथ ही उन्होंने निर्यातकों को भरोसा दिलाया कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाओं का पूरा सहयोग मिलेगा. उन्होंने मत्स्य पालन के क्षेत्र में निवेश पर हुए, खासतौर से समुद्री केज कल्चर, मोती की खेती और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के क्षेत्रों में निवेश में तेजी आई है.
केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी का कहना है कि एमपीईडीए, ईआईसी और वाणिज्य विभाग के समन्वय से एक केंद्रित बाजार विविधीकरण रणनीति तैयार की गई है. उन्होंने बताया कि लगभग चालीस देशों के राजदूतों के साथ कूटनीतिक संवाद से उत्साह जनक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं और इस बात पर जोर दिया कि बाजार विविधीकरण को लक्षित उत्पादों-विशेष रूप से रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य खंड के साथ जोड़ना जरूरी है.
विभाग द्वारा समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों और विदेशों में भारतीय मिशनों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित करने में सुविधा प्रदान की जाएगी. साथ ही, एमपीईडीए से आग्रह किया गया कि वह निर्यातकों के समर्थन के लिए क्षमता निर्माण पहलों को सुदृढ़ करे, ताकि अनुपालन, प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात तैयारी को बढ़ाया जा सके.
Meat Production: पश्चिम बंगाल नहीं, UP को दिया गया मीट उत्पादन में नंबर वन बनने का टॉरगेट
Egg Expiry: अंडे की एक्सपायरी प्रिंट करने पर NECC ने कही ये बड़ी बात, पढ़ें CEO का इंटरव्यू
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today