Bater Farming: सेहत भी बनती है तो 50 हजार लगाकर बटेर पालन से होती है 10 लाख की कमाई

Bater Farming: सेहत भी बनती है तो 50 हजार लगाकर बटेर पालन से होती है 10 लाख की कमाई

Bater Farming बटेर पालन भारत में एक तेजी से बढ़ता कारोबार बन रहा है. यह कारोबार कम लागत और कम जगह में होने के चलते लोगों की पसंद बन रहा है. राज्य की पोल्ट्री पॉलिसी और जरूरी लाइसेंस के बाद इसे शुरू किया जा सकता है. सिर्फ 50 हजार रुपये की मामूली लागत पर इसे शुरू किया जा सकता है. 

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Bater Farming: सेहत भी बनती है तो 50 हजार लगाकर बटेर पालन से होती है 10 लाख की कमाई बटेर पालन से जुड़ी सारी बातें

Bater Farming संख्या बेशक कम हो, लेकिन मुर्गे (चिकन) के बाद पोल्ट्री मीट में बटेर को पसंद किया जा रहा है. एक्सपर्ट की मानें तो बटेर से सेहत भी बनती है तो बटेर पालन मुनाफा भी खूब कराता है. आज बाजार में बटेर के मीट और अंडों की खूब डिमांड है. बटेर एक पोल्ट्री बर्ड है. इसके मीट और अंडों की मांग बाजार में लगातार बनी रहती है. एक्सपर्ट के मुताबिक बटेर के मीट में पौष्टिकता के ज्यादातर गुण पाए जाते हैं. यही वजह है कि बटेर का मीट बाजार में खासा महंगा में मिलता है. मीट डिमांड और इसके महंगा होने के चलते बटेर पलकों को अच्छा खासा मुनाफा मिल जाता है. 

एक्सपर्ट का दावा है कि बटेर के मीट में प्रोटीन की मात्रा  25 फीसद तक होती है. खाने में बटेर के प्रोटीन को बहुत अच्छा माना जाता है. बटेर के अंडों की बात करें तो इसमे 41 तत्व पाए जाते हैं. मुर्गी पालन की तरह से बटेर से लम्बे वक्त तक मुनाफा नहीं कमा सकते हैं. बटेर सिर्फ 60 हफ्तों ही अंडे देती है. हालांकि जंगली बटेर पांच से छह साल तक अंडे दे सकती है.

बटेर पालन से जुड़े कुछ जरूरी टिप्स 

  • सिर्फ 50 हजार रुपये जैसी छोटी रकम लगाकर बटेर पालन से सालाना 10 लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है. 
  • बटेर बहुत छोटा पक्षी होता है, इसलिए मुर्गी पालन की तरह से इसके लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती है. 
  • बटेर की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है. मादा बटेर 40 से 45 दिन में अंडा देने के लिए तैयार हो जाती है, वहीं मीट के लिए भी 50 दिन तक की बटेर बाजार में बिक जाती है. 
  • मुर्गियों के मुकाबले बटेर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा होती है, इसलिए बटेर जल्दी बीमारियों की चपेट में नहीं आती है. 
  • जापानी बटेर (Japanese Quail) और बॉब व्हाइट बटेर (Bob white Quail) जैसी नस्लें ज्यादा मुनाफा देने वाली मानी जाती हैं. इन्हें भारत में भी पाला जाता है. 
  • बटेर के मीट और अंडों की होटल-रेस्टोरेंट में बहुत डिमांड होत है. वहीं सर्दियों के मौसम में खुले बाजार में भी बटेर के मीट की बहुत डिमांड होती है. 

बटेर से बना सकते हैं 5 से 6 प्रोडक्ट 

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राज नारायण का कहना है कि बटेर का इस्तेमाल सिर्फ मीट और अंडे के लिए ही नहीं किया जाता है. बटेर से करीब पांच से छह  तरह के प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. लेकिन बटेर से प्रोडक्ट बनाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत होती है. बरेली में ये ट्रेनिंग दी जाती है. बटेर के अंडे का अचार बहुत अच्छी रेसिपी मानी जाती है. बटेर का मीट चिकन बहुत महंगा मिलता है. चिकन दो से ढाई सौ रुपए किलो तक मिल जाता है. जबकि बटेर का मीट एक हजार रुपये से लेकर से 1200 रुपये किलो तक बिकता है. हालांकि मौसम के हिसाब से इसके दाम घटते-बढ़ते रहते हैं.

बटेर पालन से जुड़ी 5 बातें 

  1. बटेर के अंडे और मीट सीजन पर ही बिकते हैं. 
  2. बटेर पालन किसी भी तापमान वाले मौसम में किया जा सकता है.
  3. मुर्गी पालन के लिए 28 से 32 डिग्री सेल्स‍ियस तापमान की जरूरत होती है. 
  4. देश में पहली बार बटेर पालन 1970 में हुआ था. 
  5. उत्तर भारत में बटेल पालन तेजी से बढ़ रहा है. 

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